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ड्राइविंग लाइसेंस बनाने में धांधली का पर्दाफाश्ा

Sat, 09 Aug 2014 12:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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यूटी प्रशासन के रजिस्टरिंग एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए) में शुक्रवार को एक दलाल व आरएलए के स्वीपर के बीच सांठगांठ से बन रहे ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) के खेल का पर्दाफाश हुआ।
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भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश सचिव महकवीर संधू ने स्टिंग ऑपरेशन करते हुए इस सारे खेल की रिकार्डिंग की इसकी जानकारी आरएलए अधिकारियों को दी। आरएलए कशिश मित्तल ने तुरंत यूटी पुलिस की विजिलेंस टीम को इसकी सूचना दी और विजिलेंस टीम मौके पर आकर आरएलए के स्वीपर राकेश को पूछताछ के लिए ले गई।

बाद में विजिलेंस ने दलाल सोनू को भी पकड़ लिया। इस पूरे मामले में आरएलए की एक महिला स्वीपर पर भी शक है और इसकी भी जांच हो रही है। आरएलए ने राकेश की सेवाएं समाप्त करने की तैयारी कर ली है।
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जानकारी के मुताबिक संधू अपनी दो बहनों के साथ उनका लाइसेंस बनवाने के लिए आरएलए की पार्किंग में गए। यहां सोनू पहले से मौजूद था। संधू और सोनू के बीच लाइसेंस बनवाने के लिए पैसों की बातचीत हुई और वहीं से सोनू ने राकेश को फोन किया।

संधू ने सोनू को 1700 रुपये दिए। कुछ देर बाद राकेश वहां पर आया और दोनों आवेदकों की डीएल की फाइल लेकर वह आरएलए चला गया। यहां आकर उसने कंप्यूटर में दोनों आवेदकों का डाटा फीड कराया। राकेश जो भी कर रहा था इसकी सारी रिकार्डिंग स्पाई कैमरे में रिकार्ड हो रही थी। इसी दौरान भाजयुमो के कई और कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंच गए।

संधू ने जब रिकार्डिंग कर ली तो उसने आरएलए कशिश मित्तल को फोन किया, लेकिन मित्तल यूटी सचिवालय में बैठक में थे। कुछ देर के बाद मित्तल आरएलए कार्यालय आए तो संधू ने उन्हें पूरी रिकार्डिंग दिखाई।

मित्तल ने पूरी रिकार्डिंग देखकर विजिलेंस को फोन किया। ध्यान रहे कि आरएलए में दलालों व कर्मचारियों के बीच मिलीभगत का खेल लंबे समय से चल रहा है। इसे रोकने के लिए आरएलए कई कदम उठा रहा हैं।
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