आरोपी ने बच्ची के हाथ-मुंह बांधकर दुष्कर्म किया और बाद में पकड़े जाने के डर से मासूम की गला दबाकर हत्या कर दी। किसी को शक नह हो इसके लिए उसने शव को अपने कमरे की अलमारी में छिपा दिया। माता-पिता जब देर शाम को घर पहुंचे तो उन्होंने सन्नी से बच्ची के बारे में पूछा। बाद में बच्ची नहीं मिली तो इसकी सूचना कसौला थाना पुलिस को दी गई।
बच्ची की तलाशी के दौरान सन्नी हमदर्द बनने व उसे तलाशने का ड्रामा करता रहा। इसी दौरान पुलिस को जब कुछ शक हुआ और सन्नी से कड़ी पूछताछ की गई तो वह टूट गया। उसने बताया कि उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म करके उसकी गला दबाकर हत्या कर दी है और शव को अलमारी में छिपा रखा है। तत्पश्चात पुलिस ने रेप व हत्या का केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया था।
मामले में चालान पेश होने के बाद शुक्रवार को अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश नरेश कुमार ने गवाहों व बयानों के आधार पर मात्र 6 माह में इस का फैसला सुनाते हुए आरोपी सन्नी को फांसी की सजा सुनाई है।
न्यायाधीश ने माना गंभीर अपराध, ऐसे व्यक्ति को फांसी ही होनी चाहिए
मामले में पैरवी करने वाले सरकारी अधिवक्ता आरके श्योराण ने बताया कि इस मामले में हमने आरोपी को फांसी की सजा की मांग की थी। जिसके बाद अदालत की तरफ से गंभीर अपराध मानते हुए कहा गया ऐसे व्यक्ति को फांसी ही होनी चाहिए।