नाबालिग भतीजी से दुष्कर्म के मामले में 39 वर्षीय चाचा को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने 10 साल की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 1 लाख 1 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
वहीं सबूतों के अभाव में कोर्ट दोषी की पत्नी को बरी कर चुकी है। उस पर भतीजी ने उनकी मौजूदगी में ही तीन साल तक यौन शोषण का आरोप लगाया था।
29 जून 2014 को मक्खन माजरा निवासी नाबालिग घर से लापता हो गई थी। उसके चाचा ने इंडस्ट्रियल एरिया थाने में उसके अपहरण का केस दर्ज करवाया था। पुलिस ने जांच की तो करीब तीन महीने बाद वह बिहार में एक युवक के साथ मिली थी।
पुलिस उसे चंडीगढ़ लाई, जहां उसने पुलिस में बयान दिया कि उसने उक्त युवक से अपनी मर्जी से शादी की है, क्योंकि उसका चाचा उससे जबरन कबाड़ी की दुकान पर काम करवाता था और इससे इंकार करने पर उससे मारपीट करता था। साथ ही उसने 3 साल तक लगातार उसका यौन शोषण किया, इसलिए वह घर से भाग गई थी।
बयान के आधार पर उसके चाचा के खिलाफ 26 सितंबर 2014 को नाबालिग से दुष्कर्म की धाराओं और पॉस्को एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था। नाबालिग ने आरोप लगाया था कि उसकी चाची की मौजूदगी में ही चाचा ऐसा करता था।
साथ ही किसी को इस बारे में बताने पर उसने धमकी दी थी कि उसका चाचा उन दोनों को मार देगा। इस आधार पर उसकी चाची के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया था।
वहीं बचाव पक्ष के वकील के अनुसार नाबालिग घर से प्रेमी के साथ भाग गई थी। उसके चाचा ने उसे घर लाना चाहा तो उसने चाचा पर ही गलत आरोप लगाकर उन्हें झूठे केस में फंसा दिया।