सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार का आरोप झेल रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के महिलाओं पर किए उस दावे पर कड़ी आपत्ति जताई कि इन दिनों महिलाएं पैसों की उगाही के लिए इस तरह के आरोप लगाती हैं। साथ ही न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति सी नगप्पन की पीठ ने राम रहीम की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया जिसमें सीबीआई द्वारा लगाए गए आरोप पर सवाल उठाए गए थे।
सुनवाई के दौरान बाबा राम रहीम की ओर से पेश वरिष्ठ वकील जयंत भूषण के साथी ने कहा कि उनके मुवक्किल पिछले 10 वर्षों से आरोप झेल रहे हैं। इन दिनों महिलाएं पैसों की उगाही के लिए इस तरह के आरोप लगाती हैं। वरिष्ठ वकील की इस दलील पर पीठ ने बेहद आपत्ति जताई। पीठ ने कहा, ‘आप पहले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं, जो यह आरोप झेल रहे हैं। महिलाओं के लिए इस तरह का कमेंट नहीं किया जाना चाहिए।’ पीठ ने कहा कि हम आपके अनुयायी नहीं है।
इससे पहले आरोपों पर सवाल उठाने वाली याचिका में पीड़िता के उस पत्र का हवाला दिया गया जिसमें उसने राम रहीम को ‘पिताजी’ से संबोधित किया था। भूषण ने इस पत्र को बेहद अहम बताते हुए कहा कि यह उनके मुवक्किल पर लगे आरोपों को गलत साबित करता है। सीबीआई ने वर्ष 2002 के उस गुमनाम खत के आधार पर एफआईआर दर्ज की है, जिसमें कथित तौर पर 1999 की घटना का जिक्र है।
भूषण ने कहा कि पीड़ित महिला के अगले पत्र में उनके मुवक्किल को पिता से संबोधित किया गया है, जो इस बात का प्रमाण है कि उनके मुवक्किल पर लगे आरोप झूठे हैं। इस पर पीठ ने भूषण से पूछा ‘अगर कोई किसी को बाबाजी कहता है और यह कहता है कि मैं आपसे प्यार करती हूं। तो क्या इसका मतलब यह है कि मैं आपके लिए उपलब्ध हूं। आप ये सभी बातें ट्रायल के दौरान उठा सकते हैं।’ पीठ ने उस पत्र का जिक्र करते हुए कहा कि पत्र में लिखी बातों से सहमति जैसी बात का बोध नहीं होता।