दिव्यांग नाबालिग से बलात्कार मामले की अदालत में सुनवाई चल रही थी कि आरोपी गुहार लगाते हुए गिड़गिड़ाने लगा। मामले में अदालत का फैसला सुनने के लिए हर शख्स बेकरार था। अदालत परिसर में सुबह से ही इसी दोषी किशोरी लाल की सजा को लेकर चर्चा होती ही।
किशोरी लाल ने अपने अंतिम बयानों में न्यायाधीश से गुहार लगाते हुए कहा कि जज साहब मैं अकेला कमाने वाला हूं, बच्चे छोटे और मां-बाप बूढ़े हैं। मुझसे गलती हुई है पर मेरे बच्चों का भविष्य और बूढ़े मां-बाप की तरफ देखकर सजा में नरमी बरतना।
इसके बाद न्यायाधीश प्रवीण कुमार ने फैसला लिखवाना शुरू किया और शाम सवा चार बजे बलात्कारी किशोरी लाल को सात साल कैद व 21 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। किशोरी लाल की गुहार पर अदालत ने सजा देने में नरमी दिखाई।
फैसला सुनने के बाद हर तरफ यही चर्चा थी कि अदालत ने सजा में बहुत रहमदिली दिखाई है। जिस प्रकार का अपराध था। समाज में एक संदेश देने के लिए कड़ी सजा की आस लोगों ने लगा रखी थी, ताकि कोई भी शख्स इस प्रकार का अपराध करने से पहले हजार बार सोचे।