डेरा सच्चा सौदा सिरसा में कथित तौर पर साधुओं को नपुंसक बनाने के मामले में सीबीआई जांच के एकल बेंच के फैसले के खिलाफ अपील पर गुरमीत राम रहीम को फिलहाल हाईकोर्ट से कोई अंतरिम राहत नहीं मिली है।
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हाईकोर्ट ने यहां तक कहा कि सीबीआई जांच का सामना करने में क्या दिक्कत है। हालांकि कुछ तथ्यों पर अंतिम बहस के लिए सुनवाई फिलहाल 25 फरवरी के लिए स्थगित कर दी गई।
एक्टिंग चीफ जस्टिस एसजे वजीफदार एवं जस्टिस एजी मसीह की बेंच के समक्ष राम रहीम के वकील एसके गर्ग नरवाना ने पैरवी करते हुए कहा कि यदि कोई नपुंसक बनने की सहमति देता है तो इसमें कोई अपराध नहीं बनता और न ही यह मानवाधिकार का हनन है।
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उधर सीबीआई के वकील सुखदीप सिंह संधू एवं हंस राज चौहान के वकील नवकिरन सिंह ने पैरवी की कि सीबीआई ने मामला दर्ज कर लिया है। यह भी कहा कि नपुंसक बनने पर भगवान से मिलाने का छलावा देकर नपुंसक बनाया गया।
यह भी कहा कि हरियाणा सरकार को दो बार जांच का मौका दिया गया था, लेकिन जांच नहीं कर पाने के कारण ही एकल बेंच ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच सीबीआई के हवाले की थी। यह भी कहा कि गुरमीत राम रहीम के खिलाफ कत्ल और बलात्कार के मामले का ट्रायल भी चल रहा है।
राम रहीम के खिलाफ फैसले में कड़ी टिप्पणी
नरवाना ने बेंच से कहा कि एकल बेंच ने राम रहीम के खिलाफ अपने फैसले में कड़ी टिप्पणी की है। इससे ट्रायल प्रभावित हो सकता है। नरवाना ने सुनवाई तक सीबीआई जांच पर रोक की मांग भी की, लेकिन हाईकोर्ट ने इस मांग पर कोई राहत नहीं दी। हालांकि एकल बेंच की ओर से की गई सख्त टिप्पणी को लेकर सभी पक्षों को 25 फरवरी को पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है।
एकल बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए राम रहीम ने अपील में कहा है कि यदि कोई मर्जी से नपुंसक बनता है तो यह मानवाधिकार का हनन नहीं है।
इसके अलावा हंस राज चौहान ने यह मामला 14 वर्ष बाद उठाया, वह भी सीधे हाईकोर्ट में। इससे पहले पुलिस से कोई शिकायत नहीं की गई। यह भी कहा गया कि जिस वक्त चौहान नपुंसक बनाए जाने का दावा कर रहा है, उस वक्त वह व्यस्क था। ऐसे में यह उसकी मर्जी में ही हुआ।
अपील में मांग की गई थी कि एकल बेंच का फैसला निरस्त किया जाए और अपील की सुनवाई तक फैसले पर रोक लगाई जाए। उल्लेखनीय है कि जस्टिस के.कानन की एकल बेंच ने हंस राज चौहान की याचिका को गंभीरता से लेते हुए मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया था। यह भी कहा था कि राज्य सरकार इस मामले की जांच नहीं कर सकी है, जबकि इस संबंधी आदेश भी दिया गया था।
हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने की कार्रवाई
सीबीआई ने जबरन नपुंसक बनाने के मामले में डेरा सच्चा सौदा और उसके प्रमुख गुरमीत राम रहीम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। बुधवार को दर्ज एफआईआर में राम रहीम के साथ उनके तथाकथित धार्मिक संस्था के डॉक्टर व अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि राम रहीम के आदेश पर हरियाणा के सिरसा आश्रम में 400 भक्तों का जबरन नपुंसक बना दिया गया था।
सीबीआई के मुताबिक राम रहीम ने भक्तों से कहा था कि अगर वह नपुंसक बन जाते हैं तो उन्हें सीधे ईश्वर की प्राप्ति होगी और खुद राम रहीम उनके वाहक होंगे। उन्हीं भक्तों में से एक हंसराज चौहान उर्फ हक्की ने राम रहीम के खिलाफ पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी। अदालत ने 23 दिसंबर को सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।
राम रहीम को सीबीआई का झटका उस समय लगा है, जब उन पर करोड़ों की लागत से बनी बहुचर्चित फिल्म मैसेंजर ऑफ गॉड रिलीज होने को तैयार है।
सीबीआई के मुताबिक एजेंसी ने याचिकाकर्ता हंसराज की ओर से कोर्ट में दाखिल याचिका को ही एफआईआर का आधार बनाया है। एजेंसी ने हरियाणा पुलिस में दायर मामलों और संबंधित सभी कागजातों को अपने कब्जे में ले लिया है। अदालत के आदेश पर हंसराज की मेडिकल जांच भी की गई थी, जिसमें उसे नपुंसक पाया गया।
एफआईआर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 417, 326, 506 और 120बी के तहत दर्ज की गई है। गौरतलब है कि राम रहीम पर एक पत्रकार और डेरा के भक्त की हत्या का मुकदमा पहले से चल रहा है। इसके अलावा उन पर एक महिला भक्त के यौन उत्पीड़न का मुकदमा भी चल रहा है।