बस में रोती रही, किसी ने मदद नहीं की
छात्रा ने बताया कि वह पूरे रास्ते रोती रही, लेकिन बस में मौजूद किसी भी यात्री ने उसकी मदद नहीं की। उसे सेक्टर-43 बस स्टैंड पर उतरना था, लेकिन जबरन रास्ते में ही उतार दिया गया। बस से उतारने के बाद वह किसी तरह हल्लोमाजरा पुलिस चौकी पहुंची, जहां लिखित शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
बढ़ गया तनाव
छात्रा का कहना है कि इस घटना ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया है। वह रात-रात भर सो नहीं पा रही है। उसका इलाज भी चल रहा है। तनाव इतना बढ़ गया है कि दवाओं की डोज बढ़ा गई दी है। इस घटना का छात्रा ने वीडियो भी बना लिया था, जिसमें वह फूट-फूट कर रोती दिख रही है। उसने शिकायत के साथ बस नंबर, टिकट और मेडिकल दस्तावेज भी लगाए हैं।
तीन दिन तक भटकती रही पीड़िता
पीड़िता ने आरोप लगाया कि शुक्रवार को जब वह सेक्टर-9 स्थित पुलिस मुख्यालय शिकायत लेकर पहुंची तो पुलिसकर्मी टालमटोल करते रहे। उसे कहा गया कि यहां लिखित शिकायत ली जाती है। शनिवार को जब पीड़िता लिखित शिकायत लेकर फिर मुख्यालय पहुंची तो कहा पब्लिक विंडो बंद है। पुलिसकर्मियों ने ऑनलाइन शिकायत देने की सलाह दी, लेकिन किसी ने ऑनलाइन प्रक्रिया की जानकारी नहीं दी। इसके बाद वहां से जाने के लिए कहा। बाद में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाई।
मुख्यालय के गेट पर बैठे पुलिसकर्मी पर बदसलूकी का आरोप
मुख्यालय के बाहर दो अन्य शिकायतकर्ता कांसल निवासी प्रवेश और मानसा निवासी गुरदीप ने भी पुलिस मुख्यालय के गेट पर तैनात पुलिसकर्मी पर बदसलूकी करने का आरोप लगाया है। उनका कहना था कि पुलिस ने मदद करने के बजाय उन्हें वहां से भगा दिया।
पीड़िता की एसएसपी से अपील
पीड़ित छात्रा ने एसएसपी को दी शिकायत में कहा है कि यह मामला न केवल नस्लीय भेदभाव बल्कि क्षेत्रीय असहिष्णुता और महिलाओं के सम्मान पर प्रहार है। ऐसी घटनाएं पूर्वोत्तर भारत के नागरिकों की गरिमा और सुरक्षा को चुनौती देती हैं। उसने मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए कर उसे न्याय दिलाया जाए।
शनिवार को पब्लिक विंडो खुली होती है, शिकायत ली जानी चाहिए थी। जांच करवाई जाएगी कि आखिर युवती की शिकायत क्यों नहीं ली गई। युवती की शिकायत पर हल्लोमाजरा चौकी पुलिस ने कार्रवाई क्यों नहीं की, यह भी जांच की जाएगी। -कंवरदीप कौर, एसएसपी, चंडीगढ़