कंपनी के कर्मचारियों को नौ बजे तक बायोमेट्रिक तरीके से हाजिरी दर्ज करानी होती है। शुक्रवार सुबह सवा नौ बजे तक किसी कर्मचारी की हाजिरी दर्ज न होने पर कंपनी के मुख्यालय कोच्चि में सीसीटीवी कैमरे चेक किए गए। वारदात का पता चलने पर लुधियाना के एआरएम को सूचना दी गई। एआरएम से घटना की जानकारी मिलने पर करीब 9:20 बजे पुलिस की गाड़ियां दफ्तर के नीचे पहुंची।
हूटर सुनकर आरोपी जेवरात और नकदी लेकर भागने लगे। इसी बीच लोगों की भीड़ भी एकत्र हो गई। पुलिस की घेराबंदी देखकर डकैतों ने गोलियां चलानी शुरू कर दीं और बाइक पर बैठकर फरार होने लगे। लेकिन पुलिस ने लोगों की एक मदद से एक बाइक को घेरकर जेवरात से भरे बैग लेकर बैठे तीन डकैतों को गिरा दिया। इसके बाद गुस्साए लोगों ने उन्हें पकड़कर खूब पीटा।
इन्हें लगी गोली
कंपनी में काम करने वाले महिंदर सिंह, आदित्य शर्मा, सुरिंदर कुमार और राहगीर दीपक को गोली लगी। सभी निजी अस्पताल में दाखिल हैं। उमेश कुमार नाम का मुलाजिम की बाजू मारपीट में फ्रैक्चर हो गई।
दुगरी रोड स्थित मुथूट फाइनेंस कंपनी से 15 करोड़ रुपये का सोना लूटने के बाद फरार होते समय लोगों की मदद से गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों कई राज खोले हैं। पुलिस कमिश्नर राकेश अग्रवाल ने शनिवार की शाम प्रेस वार्ता में बताया आरोपियों की पहचान बिहार के वैशाली जिला में रहने वाले रोशन कुमार, सौरव कुमार और नालंदा के रहने वाले कमलेश कुमार के रूप में हुई है।
आरोपियों से पुलिस ने तीन देसी पिस्तौल, तीस कारतूस, लोगों को बांधने वाला सामान बरामद किया है। पुलिस ने जांच के दौरान कारतूस के नौ खोल बरामद किए है। फरार तीन आरोपियों का अभी कुछ पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने आरोपियों की तलाश के लिए आठ टीमें तैयार की हैं।
पुलिस कमिश्नर राकेश अग्रवाल ने बताया कि अभी तक की जांच में पता चला है कि फरार तीन लुटेरे भी बिहार के है। उन्होंने बताया लुटेरे पिछले डेढ़ महीने से इसी फाइनेंस कंपनी के दफ्तर की रेकी कर रहे थे। पूरी तरह से रेकी करने के बाद लूट के लिए आज का दिन चुना गया था। सभी आरोपी पिछले दस दिन से चंडीगढ़ में किराए पर कमरा लेकर रह रहे थे।
वह रोजाना चंडीगढ़ से लुधियाना के दुगरी रोड पर आते थे और पूरी रेकी करते थे कि कौन कितने बजे आता है और कितने लोग रोजाना दफ्तर में आते हैं। तीन दिन पहले उन्होंने पूरी रिहर्सल भी की थी कि वारदात को अंजाम कैसे दिया जाए और किस रास्ते से फरार होना है। पुलिस कमिश्नर के अनुसार आरोपी सौरव कुमार के खिलाफ बिहार में सेंट्रल बैंक में लूट करने और पेट्रोल पंप लूटने का मामला दर्ज है। वह दोनों मामलों में भगोड़ा है।
दुगरी रोड पर फाइनेंस कंपनी में वारदात को अंजाम देने के लिए कई दिनों तक रेकी की गई थी। लुटेरों को पूरी जानकारी थी कि सिक्योरिटी गार्ड कितने बजे आता है और अधिकारी और कर्मचारी कब आते हैं। इसी के मुताबिक लुटेरे हथियार लेकर अंदर घुसे और सिक्योरिटी गार्ड समेत बाकी लोगों को बंधक बनाया। कंपनी दफ्तर के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, यह लुटेरों को पता था, लेकिन इस बात की भनक उन्हें बिल्कुल नहीं थी कि कैमरे सीधे कंपनी के हेड ऑफिस के संपर्क में हैं। वहीं दफ्तर में कितना सोना था, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लुटेरों को बैग भरने में करीब 20 मिनट लग गए।
करोड़ों के सोने की रखवाली के लिए था बिना हथियार का सिक्योरिटी गार्ड
जानकारी के अनुसार, सभी लुटेरों के पास देसी कट्टे थे। मगर करोड़ों रुपये के सोना की रखवाली के लिए कंपनी ने जो सिक्योरिटी गार्ड रखा है, उसके पास कोई हथियार नहीं था।
दहशत के बाद भी लोगों ने हिम्मत नहीं हारी और लुटेरों का किया मुकाबला
पुलिस की गाड़ियां आने के बाद आस-पास मौजूद लोगों को लूट के बारे में पता चला। लोग कंपनी के दफ्तर के बाहर इकट्ठा हो गए। जैसे ही लुटेरे नीचे आए तो पुलिस और लोगों से खुद को घिरता देख गोलियां चलानी शुरू कर दीं। सात मिनट तक लुटेरे पुलिस और लोगों से उलझे रहे। इसके बावजूद वहां मौजूद लोगों ने हिम्मत नहीं हारी और लुटेरों की गोली मारने की धमकी के बावजूद उन्हें घेरकर काबू कर लिया।
राहगीर को लगी गोली, अस्पताल वालों ने नहीं किया इलाज
जब लुटेरे नीचे उतर कर गोलियां चला रहे थे तो काम पर जा रहा दीपक भी वहां रुक गया। फायरिंग में एक गोली उसकी टांग पर लगी। उसे पास के निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया जहां अस्पताल वालों यह कहकर इलाज से मना कर दिया कि वह पहले पैसे जमा करवाए। परिवार उसे अस्पताल में छोड़कर फाइनेंस कंपनी के दफ्तर के बाहर पहुंचा और पुलिस कमिश्नर राकेश अग्रवाल को पूरी बात बताई। इसके बाद पुलिस कमिश्नर ने अधिकारियों को आदेश किया कि वह दीपक का इलाज डीएमसी अस्पताल में करवाएं। वे खुद उसे दाखिल करवा कर आए।