घर में गर्भवती महिला की डिलीवरी का ऐसा खौफनाक अंजाम होगा, परिवार ने कभी सोचा न होगा। घटना, हरियाणा में हुई। करनाल जिले में घर में ही प्रसूता की डिलीवरी कराते वक्त लापरवाही की वजह से जच्चा और बच्चा दोनों की ही मौत हो गई। पुलिस ने मृतका के पिता की शिकायत पर दाई समेत प्रसूता के पति, सास और ससुर के खिलाफ केस भी दर्ज कर लिया गया।
आरोप है कि प्रसव से पहले पीड़िता करीब 12 घंटे घर पर ही तड़पती रही, लेकिन ससुराल पक्ष के लोगों ने उसे अस्पताल में दाखिल नहीं कराया। वहीं, मृत बच्चे को भी दबा दिया गया, जिसे बाद में उन्होंने बाहर निकाला।
फिलहाल पुलिस मामले छानबीन कर रही है। उधर, पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया और साथ ही बच्चे का विसरा रोहतक भेज दिया गया है। वहीं, इस मामले से जागरूकता अभियान पर भी सवाल उठने लगे हैं।
दाई समेत पति, सास और ससुर पर केस दर्ज
पुलिस को दी शिकायत में मृतक महिला बबीता के पिता गांव मथाना निवासी राजेंद्र ने बताया कि उन्होंने पिछले साल अप्रैल माह में बड़ी धूमधाम से अपनी बेटी बबीता की शादी करनाल के गांधीनगर निवासी प्रताप से की थी। मंगलवार शाम 3 बजे उनके पास लड़के के पिता का फोन आया कि बबीता के बेटा हुआ है, लेकिन वह जन्म से पहले ही मर गया।
इसके बाद फोन आया कि बबीता बोल नहीं रही है। दबाव देकर जब ससुराल वालों से पूछा तो उन्होंने बताया कि बबीता ने भी दम तोड़ दिया है। पूरे मामले की सूचना मिलते ही जब वे मौके पर पहुंचे थे बबीता मंजू दाई के घर पर पड़ी थी।
साथ ही सुसराल वालों ने उसके बेटे को पहले ही दफना दिया था। वहीं, लड़के के पिता ने सभी आरोप नकारते हुए लड़की वालों पर मारपीट के आरोप लगाए। महिला के परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मृतका के ससुर प्रीतम, सास अंगूरी, पति प्रताप और दाई मंजू के खिलाफ केस दर्ज किया है। बुधवार को पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।
रात तक नहीं हुई कोई कार्रवाई
मंगलवार रात तक लड़की पक्ष वालों ने इस मामले में कोई भी शिकायत पुलिस को नहीं दी। इसके बाद लड़की पक्ष वालों ने मृतक बच्चे के शव को बाहर निकलवाया और लड़के वालों के घर पहुंचे।
मायका पक्ष के संजीव, राकेश, रमेश और राजेश का आरोप है कि जैसे ही वह वहां पहुंचे तो लड़के वालों ने उनके साथ कहासुनी करते हुए मारपीट शुरू कर दी। इसके बाद मामला बढ़ा और दोनों पक्ष थाने में पहुंच गए।
अस्पताल ले जाते तो शायद बच जाते
मृतका के भाइयों ने पुलिस के सामने आरोप लगाते हुए कहा कि आरोपियों ने प्रसूता को अस्पताल तक ले जाने की जरूरत नहीं समझी। वह रात 12 बजे से दोपहर 12 बजे तक दर्द से तड़पती रही, पर किसी ने उसकी पुकार नहीं सुनी। संजीव ने कहा कि यदि उसकी बहन को सरकारी अस्पताल भी ले जाते तो शायद वह बच जाती। रमेश ने कहा कि उनकी बहन बीए पास थी और एमए करना चाहती थी, लेकिन आरोपियों ने उसे पढ़ाया तक नहीं।
जांच कर रहे हैं : थाना प्रभारी
सिटी थाना प्रभारी श्रीदत्त का कहना है कि शिकायत के आधार पर दाई समेत चार लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। पूरे मामले की गंभीरता से छानबीन की जा रही है।