आत्महत्या करने वाले गुड़गांव के मानेसर पुलिस थाने के एएसआई महावीर सिंह की पत्नी चंचल देवी ने इंसाफ के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की शरण ली है। याची ने अपने पति के सुसाइड नोट के आधार पर आरोप लगाया है कि महावीर सिंह ने दस पुलिस अफसरों के हाथों प्रताड़ना के चलते खुदकुशी की। उसने दोषी पुलिस अफसरों के खिलाफ बल्लभगढ़ (फरीदाबाद) में दर्ज कराई एफआईआर पर कार्रवाई करने या मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि दोषी पुलिस अफसर पैसे लेकर मामला रफादफा करने के लिए उन पर दबाव बना रहे हैं। जस्टिस जितेंद्र चौहान ने याचिका पर सुनवाई करते हुए हरियाणा, डीजीपी हरियाणा, एसपी फरीदाबाद समेत सभी दस आरोपी पुलिस अफसरों को 19 अगस्त के लिए नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने इसके साथ ही एसपी फरीदाबाद को अगली सुनवाई से तीन दिन पहले स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
चंचल देवी ने एडवोकेट लेख राज शर्मा और नीति शर्मा के मार्फत दायर की याचिका में कहा है कि उनके पति महावीर सिंह गुड़गांव के मानेसर पुलिस थाने में एएसआई के पद पर तैनात थे। याचिकाकर्ता की एक 18 वर्षीय बेटी और 13 वर्षीय बेटा है। गत 28 अप्रैल को महावीर सिंह ने जहरीला पदार्थ निगलकर आत्महत्या कर ली। इस मामले में महावीर सिंह के भाई ने किसी पर भी संदेह व्यक्त किए बिना केस दर्ज करा दिया। 29 अप्रैल को पोस्टमार्टम के बाद 30 अप्रैल को महावीर सिंह की देह का अंतिम संस्कार कर दिया।
याचिका में कहा गया है कि अंतिम संस्कार के अगले ही दिन याचिकाकर्ता की बेटी ने पिता का मोबाइल चेक किया तो उसमें सुसाइड नोट की जानकारी मिली। उसके आधार पर घर की अलमारी से सुसाइड नोट मिला, जो छह पन्नों का था। सुसाइड नोट में महावीर सिंह ने अपने दस विभिन्न अफसरों पर ब्लैकमेल कर बार-बार मोटी रकम वसूलने, उसे झूठे मामलों में फंसाकर उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई कराने और तीन इंक्त्रस्ीमेंट स्थायी तौर पर रुकवा देने के आरोप लगाते हुए सभी आरोपी अफसरों को अब तक दिए पैसे का पूरा विवरण लिखा गया था।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि उनके पति से बार-बार पैसा मांग रहे दस लोगों से तंग आकर ही उनके पति ने आत्महत्या की। याचिका में कहा गया कि पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 306 के तहत एफआईआर दर्ज की जबकि अन्य धाराओं के तहत दर्ज किए जाने वाले अपराधों को एफआईआर में दर्ज नहीं किया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि मौजूदा एफआईआर के आधार पर ही कार्रवाई की गई तो सभी आरोपी सजा से बच जाएंगे। याचिका में यह भी कहा गया है कि धारा 306 के तहत दर्ज एफआईआर भी पुलिस ने 2 मई को सामाजिक दबाव के चलते दर्ज की लेकिन आज तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि इस मामले में उन्हें हरियाणा पुलिस पर बिल्कुल भरोसा नहीं है, इसलिए जांच का काम सीबीआई को सौंपा जाए।