उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के हलके में पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे ईटीटी (टैट) पास कर चुके शिक्षकों को दौड़ा-दौड़ाकर लाठियों से पीटा। ये शिक्षक अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन कर पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। जैसे ही शिक्षक फिरोजपुर-फाजिल्का राजमार्ग जाम करने लगे पुलिस ने सभी को खदेड़ दिया।
आरोप है कि पुलिस ने महिला शिक्षकों के साथ हाथापाई की और बाल पकड़कर घसीटा। शिक्षकों ने बुधवार को सुखबीर बादल के हलके जलालाबाद में राज्य स्तरीय प्रदर्शन करना था। पुलिस ने इसे नाकाम करने के लिए फाजिल्का-फिरोजपुर मुख्य मार्ग के अलावा मुक्तसर सर्कुलर मार्ग, शहीद ऊधम सिंह पार्क, फिरोजपुर रोड पर पुलिस बलों की तैनाती कर दी।
ईटीटी अध्यापक यूनियन के सदस्यों ने पंजाब सरकार के विरुद्ध नारेबाजी की। पुलिस बलों ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा और बेरोजगार ईटीटी अध्यापक जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, उन्हें हिरासत में ले लिया।
सरकार ने रद़्द कर दी थी भर्ती प्रक्रिया
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि पंजाब सरकार की ओर से ईटीटी पास बेरोजगार अध्यापक जोकि पंजाब सरकार की शर्तों के अनुसार अध्यापक योग्यता परीक्षा टैट पास कर चुके हैं, को शिक्षा विभाग में नौकरी देने के लिए चालू वर्ष में फरवरी माह के दौरान एक विज्ञापन जारी किया था।
बीती 16 जून को भर्ती प्रक्रिया संबंधी मेरिट सूची जारी हो चुकी थी। इन अध्यापकों को पंजाब सरकार द्वारा नियुक्ति पत्र मिलने ही बाकी थे परंतु सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को रद कर दिया।
यूनियन पदाधिकारियों ने बताया कि बीते करीब 28 दिन से अपनी इस मांग को लेकर मरणव्रत पर बैठे थे लेकिन हरिन्द्र सिंह शेरगिल तथा कुलविंद्र सिंह पटियाला की सरकार ने कोई सुध नहीं ली। बीते 5 अक्तूबर को भी उन्होंने पंजाब सरकार से अपना हक मांगने के लिए प्रदर्शन किया था।
एसएसपी ने दिया आश्वासन
बाद दोपहर शहर में पहुंचे एसएसपी स्वप्न शर्मा ने मौके पर मौजूद एसपीडी गुरमीत सिंह व गगनेश शर्मा से पूरी स्थिति के बारे में जानकारी हासिल की।
एसएसपी ने बताया कि प्रशासन द्वारा ईटीटी अध्यापक यूनियन से बातचीत कर उनकी मांगों को पंजाब सरकार तक पहुंचा दिया गया है, अब गेंद पंजाब सरकार के पाले में है।
अध्यापक यूनियन जनता को परेशान करने के लिए शहर में चक्का जाम करने जा रहे थे जिसे पुलिस ने विफल बना दिया है। उन्होंने कहा कि एहतियात के तौर पर करीब 2 दर्जन अध्यापकों को हिरासत में लिया है जिन्हें बाद में रिहा कर दिया जाएगा।