मोगा में एडिशनल जिला एवं सेशन जज की अदालत में शुक्रवार को ऑर्बिट बस कांड की सुनवाई हुई। अदालत ने आरोपियों की जमानत अर्जी की सुनवाई 29 मार्च तक टाल दी है। घटना में मारी गई नाबालिग लड़की अर्शदीप कौर के नाबालिग भाई अकाशदीप सिंह ने बतौर चश्मदीद गवाह बयान दर्ज करवाए। अदालत ने इस केस की अगली सुनवाई के लिए 5 अप्रैल तय की है।
एडिशनल जिला एवं सेशन जज गुरजंट सिंह की अदालत में मृतका अर्शदीप कौर के नाबालिग भाई अकाशदीप सिंह ने शुक्रवार को अपने बयान दर्ज करवाए। उससे सरकारी एवं बचाव पक्ष के वकीलों ने सवाल पूछे। अकाशदीप ने पहले उसकी बहन और बाद में उसकी मां छिंदर कौर को चलती बस में से धक्का देने की बात कही।
उसने यह भी कहा कि उसकी मां का टिकट को लेकर झगड़ा हुआ था। लेकिन अकाशदीप सिंह अदालत में मौजूद आरोपियों को पहचान नहीं सका। उसने बताया कि घटना के समय बस में किसी ने कोई शोर नहीं मचाया। इस मौके पर उसके पिता सुखदेव सिंह भी मौजूद रहे। केस में मुख्य चश्मदीद गवाह एवं मृतका की मां छिंदर कौर और पिता सुखदेव सिंह की अदालत में गवाही हो चुकी है।
वह गवाही के मौके पुलिस को दिए बयानों की पुष्टि नहीं कर सके और न ही आरोपी पहचान सके थे। कानूनी माहिरों के अनुसार महिला छिंदर कौर के अलावा उसके पति सुखदेव सिंह की तरफ से मुकरने से जहां पुलिस की कहानी कमजोर हो गई थी, वहां आरोपियों को अदालत से बड़ी राहत मिल सकती है।
इस केस की अगली सुनवाई 5 अप्रैल तय की है। इस केस में नामजद आरोपियों रणजीत सिंह निवासी बठिंडा, सुखविंदर सिंह उर्फ पंम्मा निवासी बहावल वाली थाना अबोहर जिला फाजिल्का, गुरदीप सिंह उर्फ जिम्मी निवासी दशमेश नगर मोगा और अमर राज दाना निवासी चकबखतू जिला बठिंडा ने अदालत में दी जमानत के लिए अर्जी पर सुनवाई 29 मार्च को होगी।
बादल परिवार की मालकी वाली बस कंपनी ऑर्बिट में बीते साल 29 अप्रैल की शाम को नाबालिग लड़की अर्शदीप कौर से छेड़छाड़ के बाद चलती बस से कथित तौर पर फेंकने का आरोप है। इस मामले में महिला छिंदर कौर के बयानों पर थाना बाघापुराना पुलिस ने 30 अप्रैल को आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था।