भ्रष्टाचार के एक मामले में सजा पा चुके जिला अदालत के पूर्व जज दोषी सुरिंदर सिंह भारद्वाज को अदालत ने सीबीआई की कस्टडी से फरार होने के मामले में शुक्रवार को सजा सुनाई। दोषी सुरिंदर सिंह भारद्वाज को एक साल की सजा सुनाई गई। साथ ही पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
करीब 15 साल पुराने इस मामले में लोअर कोर्ट ने चार साल पूर्व भारद्वाज को बरी किया था। लेकिन प्रॉसिक्यूशन ने फैसले के खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी। लोअर कोर्ट के फैसले को पलटते हुए सेशन कोर्ट ने बीते बुधवार को भारद्वाज को दोषी करार देकर उन्हें कस्टडी में भेजा था। दोषी भारद्वाज पर सात लाख रुपये रिश्वत मांगने के आरोप थे।
मई, 2003 में सीबीआई उनके घर पर सर्च कर रही थी तो सुरिंदर सिंह भारद्वाज सीबीआई को चकमा देकर फरार हो गए थे। सीबीआई की कस्टडी से फरार होने के मामले में भारद्वाज के खिलाफ आईपीसी-224 के तहत केस दर्ज किया गया था। दोषी भारद्वाज को इससे पहले वर्ष 2009 में रिश्वत मामले में तीन साल की सजा दी जा चुकी है। वह देश के पहले जज थे, जिन्हें भ्रष्टाचार के केस में सजा सुनाई गई थी।
उन्होंने सजा के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अपील की थी, जो फिलहाल लंबित है। भारद्वाज चंडीगढ़ में अकादमी चलाते हैं और उनकी अकादमी में ही एचसीएस ज्यूडिशियल पेपर लीक मामले की आरोपी सुनीता और सुशीला पढ़ती थी।