लखनऊ से मोहाली तक फैले किडनी कांड की कुछ और पर्तें खुलने की उम्मीद जगी है। अदालत में इस केस की सुनवाई के दौरान सूर्या किडनी सेंटर, सेक्टर-68 के डॉ. अरजिंदर सिंह बैंस की भूमिका सामने आई थी।
इसके बाद पुलिस डॉ. बैंस को प्रोडक्शन वारंट पर लाई। उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से डॉ. बैंस को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
डॉ. बैंस कई साल पहले अमृतसर में सामने आए किडनी कांड में भी दोषी करार दिए जा चुके हैं। पिछले दिनों अमृतसर अदालत ने उन्हें इस मामले में पांच साल कैद की सजा सुनाई थी।
अमृतसर अदालत के फैसले के बाद डॉ. बैंस ने मोहाली किडनी कांड में खुद को फंसते देख मोहाली अदालत में अग्रिम जमानत याचिका भी दायर की थी। परंतु अदालत ने उसे खारिज कर दिया था।
लखनऊ पुलिस ने पिछले साल किडनी कांड का पर्दाफाश किया था, जिसके तार मोहाली तक जुड़े थे। उसके बाद जिला पुलिस ने मई-2012 में किडनी कांड में परचा दर्ज किया था।
जिसमें शकील, विकास, अमिताभ पांडे, मंजू पांडे, अभिषेक आनंद पांडे और सचिन को नामजद किया गया था। इस केस में चालान पेश किया जा चुका है।
केस की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता इकरामुद्दीन निवासी गाजियाबाद ने कहा कि उसकी जानकारी के बगैर उसकी किडनी निकाली गई। उसे बहन के इलाज के लिए पैसों की जरूरत थी। एक मामूली ऑपरेशन के बाद दो लाख रुपये देने का वादा किया गया था।
इकरामुद्दीन ने बयान दिया कि सूर्या किडनी सेंटर में डॉ. बैंस ने उसका ऑपरेशन किया, चार दिन बाद उसे छुट्टी दे दी गई। बाद में पता चला कि उसकी किडनी निकाल ली गई थी। इकरामुद्दीन के बयानों के बाद ही जिला पुलिस ने डॉ. बैंस को प्रोडक्शन वारंट पर लाने की अर्जी दी थी।