नोटबंदी के कारण अस्पताल वालों ने बड़े नोट लेने से इंकार कर दिया और रविवार सुबह एक व्यक्ति की मौत हो गई। मृतक का परिवार पिछले तीन दिन से बैंकों के चक्कर लगा रहा था, लेकिन उन्हें पैसे नहीं मिले। अस्पताल प्रशासन ने पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट लेने से साफ इंकार कर दिया। जब मरीज के परिजन दवाई की दुकान पर गए तो उन्होंने भी पुरानी करेंसी लेने से साफ तौर पर मना कर दिया।
समय पर इलाज और दवा न मिलने के कारण मरीज की मौत हो गई। मृतक की पहचान बस्ती जोधेवाल के न्यू कुलदीप नगर इलाके में रहने वाले बलबीर सिंह के रुप में हुई है।
बलबीर के पड़ोसी परगन ने कहा कि वह दिहाड़ी पर मजदूरी करता था और हार्ट का पेशेंट था। पिछले तीन दिन से वह बीमार चल रहा था। परिजन उसे निजी अस्पताल में ले गए तो वहा डाक्टरों ने पहले तो कहा कि पांच सौ और हजार रुपये के नोट नहीं चलेंगे। उनका बेटा पवन कुमार और पत्नी बलबीर कौर किसी तरह नई करेंसी का इंतजाम कर आए और इलाज के लिए पैसे जमा करा लिए।
नीला कार्ड लेकर भी अस्पतालों में गए, लेकिन अस्पतालों ने नहीं किया इलाज
मौत
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जब वह ज्यादा पैसे जमा नहीं करा सके तो अस्पताल प्रशासन ने उन्हें कहा कि इसका इलाज उनके पास नहीं है लिहाजा वह उसे डीएमसी अस्पताल में ले जाए। डीएमसी अस्पताल वालों ने भी पांच सौ और हजार रुपये के नोट लेने से साफ तौर पर मना कर दिया। जब वह दवाई लेने गए तो वहां भी उनके नोट नहीं चले। परिवार वालों ने अपने रिश्तेदार और अन्य लोगों से नई करेंसी का जुगाड़ कर अस्पताल में जमा कराए, लेकिन इसके बाद अस्पताल वालों ने ज्यादा पैसों की मांग की।
परगन ने आरोप लगाया कि पिछले तीन दिनों से बलबीर के परिजन बैंक की लाइनों में खड़े हो रहे थे, लेकिन उन्हें पैसे नहीं मिले। जिस कारण बलबीर का इलाज नहीं हो पाया और उसकी मौत हो गई।
सभी आरोप बेबुनियाद है। अस्पताल में किसी को भी इलाज के लिए मना नहीं किया गया है। बड़े नोट लेने के लिए 24 नवंबर की तारीख तय है तो मना करने का सवाल ही नहीं उठता।
डॉ. संदीप, एमसी, डीएमसी अस्पताल