अमृतसर जेल में आग लगने से हुई कैदी कुलवंत सिंह की मौत का रहस्य अभी बरकरार है। कैदी खुद जला या फिर जलाया गया, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।
मामले की जांच अभी पूरी नहीं हो पाई है। वीरवार को हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने रिपोर्ट दाखिल करने के लिए मोहलत मांगी।
चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस अरुण पल्ली पर आधारित खंडपीठ ने सरकार को अंतिम मौका देते हुए मोहलत के आग्रह को स्वीकार कर लिया। मामले की अगली सुनवाई 24 अप्रैल को होगी।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कैदी की मौत कैसे हुई। जेल में कुलवंत सिंह की बैरक में माचिस कैसे पहुंची, इस पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिए कि इस मामले में पीड़ित पक्ष को उचित मुआवजा देने पर निर्णय लिया जाए और मुआवजा राशि के संबंध में हाईकोर्ट को भी सूचित किया जाए।
फरवरी 2012 में अमृतसर की सेंट्रल जेल में कैदी कुलवंत सिंह अचानक आग की चपेट में आ गए। आग में वह 50 फीसदी जल गए थे। उन्हें गंभीर हालत में गुरु नानक देव अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
अधिवक्ता नवकिरण ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर इस मामले की जांच के निर्देश जारी करने का आग्रह किया है। याचिका में कहा गया कि कैदी कुलवंत सिंह की संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत हुई है।
याचिका में हाईकोर्ट से इस मामले में निष्पक्ष जांच के निर्देश जारी करने आग्रह किया गया है।