1992 में जालंधर के नूरमहल के संघे खालसा गांव में बहुजन समाज पार्टी के वर्करों की हत्या के आरोप में पूर्व आतंकी सुक्खी काहलों को शुक्रवार को एडिशनल सेशन जज की अदालत ने बरी कर दिया है।
पुलिस सुक्खी काहलों के खिलाफ कोई ठोस गवाह पेश नहीं कर सकी, जिसके आधार पर एडिशनल सेशन जज अरुणदीप वशिष्ठ ने सुक्खी काहलों को बरी कर दिया।
सुक्खी काहलों पर आरोप था कि 16 फरवरी, 1992 को उसने अपने साथियों के साथ मिलकर बहुजन समाज पार्टी के 9 वर्करों की हत्या कर दी थी। बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार ओमप्रकाश के पक्ष में प्रचार कर रहे वर्करों पर कार सवार युवकों ने फायरिंग की थी।
इस हत्याकांड के बाद सुक्खी काहलों अपना नाम बदलकर एचएस काहलों के नाम से जालंधर के मोता सिंह नगर में रहने लगा था। 2006 में सुक्खी काहलों के बारे में खुलासा हुआ था कि वह एचएस काहलों नहीं बल्कि सुक्खी काहलों है, जिसके बाद उस पर केस दर्ज हुए।
सुक्खी काहलों को दिल्ली पुलिस ने किसी अन्य मामले में गिरफ्तार किया था। वहां से दिसंबर 2012 में उसको जालंधर की नकोदर पुलिस ने प्रोडक्शन वारंट पर लिया। 1 जनवरी, 2013 को सुक्खी को चार्जशीट कर दिया गया था।
शुक्रवार को अदालत ने बचाव पक्ष के वकील की ओर से पेश दलीलों पर सहमत होते हुए सुक्खी काहलों को बरी कर दिया।
बताया जा रहा है कि सुक्खी काहलों प्रदेश के डीजीपी स्तर के एक अधिकारी का काफी करीबी रहा है। यही कारण है कि जब उसके जिंदा होने का खुलासा हुआ तो डीजीपी को भी अपनी सफाई देनी पड़ी थी।