साइबर ठगों के सामने चंडीगढ़ की स्मार्ट पुलिस फेल साबित हो रही है। पांच साल में 22,292 लोग सिटी ब्यूटीफुल में जालसाजों का शिकार हुए। सबसे ज्यादा 6537 मामले 2020 में सामने आए। हैरानी की बात तो यह है कि 258 केस दर्ज हुए और गिरफ्तारी मात्र 129 लोगों की हुई।
साइबर सेल के अनुसार, लोगों के मोबाइल और ईमेल पर लिंक भेजकर धोखाधड़ी की जा रही है। उस लिंक पर क्लिक करते ही लोगों के बैंक अकाउंट से जुड़ा विवरण शातिरों तक पहुंच जाता है और बड़े आराम से वह चूना लगा देते हैं। इन दिनों नौकरी लगवाने के नाम पर धोखाधड़ी कर रहे हैं। साइबर सेल के इंचार्ज इंस्पेक्टर हरिओम ने बताया कि किसी भी अंजान व्यक्ति को अपने बैंक खाते से संबंधित जानकारी न दें।
हाल ही में पीड़ितों ने नौकरी डॉट कॉम पर नौकरी के लिए पंजीकृत किया। उन्हें अंजान नंबर से कॉल आई और एडवांस में पंजीकरण के लिए रुपये मांगे। पीड़ितों ने रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में पता चला कि फोन जालसाजों ने किया था। कुछ तो लोगों के नाम से फेसबुक आईडी बनाकर जानकारों से रुपये मांग रहे हैं। आरोपियों ने पुलिस अधिकारियों तक के नाम की फेसबुक आईडी बना ली।
2020 में कुल 6500 शिकायतें
कार्ड क्लोनिंग, एटीएम पिन, ऑनलाइन शॉपिंग, अकाउंट हैकिंग, ऑनलाइन नौकरी, ओएलएक्स पर खरीददारी, ऐनी डेस्क सॉफ्टवेयर से जुड़ी प्रमुख रहीं
मोबाइल और सिम किसी दूसरे का करते हैं इस्तेमाल
पुलिस जालसाज तक पहुंचने के लिए मोबाइल नंबर से लॉकेशन ट्रेस करती है। वहां पहुंचती है तो पता चलता है उनके नाम पर कोई दूसरा व्यक्ति सिम का इस्तेमाल कर रहा है। जालसाज इतने शातिर हैं कि वह कॉल कहीं से करते हैं और रुपये किसी दूसरी जगह से निकाले जाते हैं। इसलिए पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने में दिक्कतें आती हैं। आरोपी दूर दूर राज्यों में बैठकर धोखाधड़ी करते हैं।
सालों से लटका हुआ है साइबर थाने का प्रस्ताव
साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों को देखते हुए वर्ष 2018 में पुलिस विभाग ने शहर में अलग से साइबर थाना बनाने का प्रस्ताव भेजा था लेकिन अब तक प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली है। हैदराबाद, बेंगलुरु, जयपुर समेत अन्य शहरों में साइबर अपराध से निपटने के लिए अलग से पुलिस थाना है, जबकि चंडीगढ़ में ऐसा नहीं है। साइबर सेल का कहना है कि अगर अलग से थाना बन जाए तो काफी हद तक साइबर अपराधों में कमी आ सकती है।
वर्ष 2021 में इस तरह से हुई धोखाधड़ी
- एटीएम/डेबिट/क्रेडिट क्लोनिंग और मिसयूस, कार्ड चेंजिंग और एटीएम से रुपये निकाल 785 लोगों से ठगी
- एटीएम कार्ड का पिन नंबर हासिल कर ऑनलाइन रुपये निकालने की 545 लोगों से ठगी
- यूपीआई लिंक के जरिए फ्रॉड ट्रांजेक्शन कर 186 लोगों से ठगी
- फेंक लिंक भेजकर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर 125 लोगों से ठगी
- व्हाट्सएप, आईएमओ और वीओआईपी कॉल कर 1066 लोगों से ठगी
- फेसबुक और इंस्टाग्राम की आईडी को हैक कर 458 लोगों से ठगी
- ईमेल ट्विटर व अन्य वेबसाइट को हैक कर और जाली आईडी बनाकर 195 लोगों से ठगी
- ओएलएक्स पर खरीदने और बेचने को लेकर 303 लोगों से ठगी
- नौकरी लगवाने और वीजा और वर्क पर्मट लगवाने के नाम पर 280 लोगों से ठगी
- लॉटरी लगने, गिफ्ट और प्राइज मनी का लालच देकर 125 लोगों से ठगी
- लोन दिलवाने के नाम पर 136 लोगों से ठगी
- फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर सामान खरीदने बेचने को लेकर 653 लोगों से ठगी
- टावर लगवाने का बहाना लगाकर 5 लोगों से ठगी
- बीमा और एलआईसी पॉलिसी के नाम पर 27 लोगों से ठगी
- ग्राहक सेवा के रूप में गूगल के माध्यम से 107 लोगों से धोखाधड़ी
- मोबाइल, लैपटॉप से 8 लोगों से ठगी।
- डाटा चोरी कर 28 लोगों से धोखाधड़ी।
- अनुरोध/सूचना से 461 लोगों से ठगी
- व्हाट्सएप, टिकटॉक और यूट्यूब से परेशान कर 63 लोगों से ठगी
साल शिकायतें एफआईआर दर्ज गिरफ्तार
2017 2242 43 32
2018 3164 35 16
2019 4793 35 13
2020 6537 80 33
2021 5556 65 35
93 शिकायतों पर एक पुलिसकर्मी
प्रत्येक वर्ष साइबर सेल में आने वाली शिकायतों का आंकड़ा दोगुना हो रहा है लेकिन केस के निपटारे का आंकड़ा काफी कम है। इसकी एक वजह यह भी है कि साइबर सेल में अभी डीएसपी, इंस्पेक्टर, पांच सब इंस्पेक्टर 10 एएसआई समेत लगभग 70 पुलिसकर्मियों की तैनाती है। 2020 में साइबर सेल को 6500 से ज्यादा शिकायतें मिली थीं। यानी सिर्फ एक पुलिसकर्मी औसत 93 शिकायतों पर काम कर रहा है, जो काफी बड़ा आंकड़ा है। वहीं अगर कुछ और पुलिसकर्मियों की साइबर सेल में तैनाती कर दी जाए, तो यह आंकड़ा काफी हद तक कम हो सकता है।