सेक्टर 21 निवासी कंप्यूटर टीचर मोनिका की हत्या के मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश एसके अग्रवाल की अदालत में सुनवाई हुई।
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने मोनिका की मौत से पहले के उसके वैवाहिक जीवन को सुखमय बताया। उन्होंने ससुरालियों पर लगाए हत्या और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
उन्होंने दावा किया कि मोनिका के परिजनों ने ससुरालियों पर प्रताड़ना के आरोप लगाते हुए जो लैटर अदालत में पेश किए हैं, वे फ्रैब्रिकेटिड हैं। लैटर में लिखी गई बातें वर्ष 2003 से 2004 के बीच की हैं जबकि मोनिका की मौत 2012 में हुई।
अदालत में मोनिका की लिखाई के मिलान को लेकर प्रस्तुत किए गए उसके स्कूली रजिस्टर में इंग्लिश में लिखा गया है जबकि लैटर्स हिंदी में हैं। साथ ही पत्रों पर कहीं भी मोनिका के हस्ताक्षर नहीं थे।
बचाव पक्ष ने बहस के दौरान कहा कि यदि पति-पत्नी में किसी प्रकार का झगड़ा होता था तो पड़ोसियों ने कभी कोई ऐसी घटना क्यों नहीं देखी। पुलिस ने उन्हें गवाह क्यों नहीं बनाया।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तीन दिसंबर की तय की है। गौरतलब है कि सेक्टर 21 निवासी कंप्यूटर टीचर मोनिका की 15 अक्तूबर 2012 को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। मोनिका के भाई अमित ने बहन की हत्या की आशंका जताई थी।
लेकिन पुलिस ने मामले में आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज कर पति विकास गोयल , सास प्रेमलता और ससुर ज्ञान प्रकाश गोयल को गिरफ्तार किया था।
अगले दिन उनकी निशानदेही पर पुलिस ने देवर विशाल को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने मोनिका के घर पर जाकर दोबारा से जांच की तो कोठी से खून से सनी चादर मिली थी। जिससे उन्होंने धो रखा था।
पुलिस ने मामले में सभी पर सबूत छिपाने की धारा जोड़ दी थी। मोनिका को इंसाफ दिलाने केपरिजनों, न्यू पब्लिक स्कूल के टीचर, स्वयसेवी संस्थाए और छात्र संगठन के सदस्यों ने मिलकर सेक्टर 15 से प्लाजा होते हुए सेक्टर 21 तक कैंडल मार्च निकाला था।
बहन केपोस्टमार्ट रिपोर्ट पर अमित जिंदल ने विशेषज्ञों की राय लेकर एसएसपी से कई पहलुओं पर जांच करवाने के लिए गुहार लगाई थी। एसएसपी ने मामले में एसआईटी गठित की थी। बाद में सीएफएसएल रिपोर्ट आने केबाद पुलिस ने मोनिका की मौत मामले में सभी पर हत्या की धारा जोड़ दी थी।