हरियाणा के बहुचर्चित हिसार के मिर्चपुर कांड में जुवेनाइल जस्टिस कोर्ट के पीठासीन अधिकारी आशीष शर्मा ने सोमवार को एक नाबालिग दोषी को तीन साल की कैद और दस हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने उसे वीरवार को दोषी करार दिया था। बाद में उसे जमानत मिल गई।
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता रजत कल्सन ने बताया कि 21 अप्रैल 2010 को मिर्चपुर कांड के बाद पुलिस ने 103 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिसमें से 98 आरोपी बालिग थे। इनका मुकदमा यहां सेशन कोर्ट से दिल्ली की रोहिणी की विशेष अदालत में ट्रांसफर किया गया था।
रोहिणी की स्पेशल कोर्ट की जज कामिनी लाऊ ने 15 आरोपियों को दोषी करार देते हुए तीन को उम्रकैद, पांच को पांच पांच साल तथा सात आरोपियों को दो-दो साल की कैद और सभी को 20-20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी। वहीं पांच नाबालिग आरोपियों के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में छह साल से सुनवाई चल रही थी।
लंबे चले इस अभियोग में अभियोजन पक्ष की तरफ से 86 गवाहों को अदालत में पेश कर गवाही कराई गई। सुनवाई की पिछली तारीख पर इस मामले में अभियोजन और आरोपी पक्ष की लंबी बहस हुई थी, जिसके बाद अदालत ने फैसला सुनाते हुए एक आरोपी को दोषी करार देते बाकि चार आरोपियों को बरी कर दिया था।
गौरतलब है कि 21 अप्रैल 2010 को नारनौंद थाने के अंतर्गत आने वाले मिर्चपुर गांव में ग्रामीणों ने पुलिस की मौजूदगी में गांव की दलित बस्ती को घेरकर उसमें आग लगा दी थी। इस घटना में वाल्मीकि समुदाय के ताराचंद और उसकी अपाहिज पुत्री सुमन की जलने से मौत हो गई थी।