पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फरीदकोट से अपहृत मनोज कपूर केस में पंजाब पुलिस को दो महीने की मोहलत दे दी है। हाईकोर्ट ने इस अवधि में केस हल नहीं होने पर मामला सीबीआई को ट्रांसफर करने का संकेत दे दिया है। दो महीने बाद सीबीआई को पेश होने को कहा गया है।
मामले में दो संदेह वाले व्यक्ति लाई डिटेक्टिंग टेस्ट से मुकर गए थे। हाईकोर्ट ने पूछा था कि इनके खिलाफ क्या कार्रवाई की और पता लगाया जाए कि इनकी भूमिका क्या है। इसके बाद से मामला टलता आ रहा है और बुधवार को पंजाब पुलिस फिर खाली हाथ पहुंची तो हाईकोर्ट ने दो महीने की आखिरी मोहलत देते हुए केस की जांच सीबीआई हवाले करने के साफ संकेत दे दिए हैं।
हाईकोर्ट ने सरकार से कहा था कि ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन पंजाब सभी संदेह वाले व्यक्तियों के लाई डिटेक्टिंग टेस्ट कराए। इस पर सरकार ने कहा था कि दो को टेस्ट के लिए बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने टेस्ट से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने इनके खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में जवाब मांगा था और साथ ही कहा था कि लाई डिटेक्टिंग टेस्ट या तो सीबीआई की दिल्ली लैब से कराया जाए या फिर गुजरात लैब से हो।
मनोज की बहन ने एडवोकेट नवकिरन सिंह के माध्यम से अर्जी देकर संदेह वाले व्यक्तियों बैंक मैनेजर, मनोज के साथी, एटीएम में पैसे डालते के लिए गई वैन के ड्राइवर सहित आठ व्यक्तियों का लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की मांग की थी। इस पर सरकार से जवाब मांगा गया था।
सरकार ने अपने जवाब में कहा था कि पुलिस का जांच मोबाइल डाटा के आधार पर राजस्थान व कोलकाता दल जा चुका है और संदेह वाले व्यक्तियों के बारे मीडिया के माध्यम से प्रचार भी किया जा चुका है। इन सभी प्रयासों के बाद मामला अब ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन को भेज दिया गया है, लिहाजा याचिका रद्द कर दी जानी चाहिए।