पिछले साल सुर्खियों में रहे किताब घोटाले के मुख्य आरोपी डॉ. विनोद कुमार की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। मोहाली के पूर्व जिला शिक्षा अफसर (डीईओ) डॉ. विनोद का शव मंगलवार सुबह 11 बजे सुखना लेक में मिला था, जिसकी शिनाख्त बुधवार को हुई।
यूटी पुलिस इसे आत्महत्या मान रही है, क्योंकि परिजनों ने किसी पर शक जाहिर नहीं किया है। डॉ. विनोद की पत्नी विजय कुमारी के अनुसार वह पिछले कुछ दिन से मानसिक रूप से परेशान थे।
माता गुजरी एन्क्लेव, खरड़ निवासी डॉ. विनोद कुमार और उनकी पत्नी विजय कुमारी शिक्षा विभाग, मोहाली में डिप्टी डायरेक्टर हैं। मंगलवार सुबह नौ बजे वे कार से दफ्तर पहुंचे।
ड्यूटी खत्म होने के बाद विजय ने पति को फोन किया, लेकिन फोन नहीं उठा। पार्किंग में खड़ी डॉ. विनोद की कार से उनका मोबाइल, पर्स और चाबी मिली। मंगलवार पूरी रात परिवार के लोग डॉ. विनोद की तलाश करते रहे लेकिन कहीं कुछ पता नहीं चला। बुधवार को सुखना में अज्ञात शव मिलने की खबर पढ़ कर एक साथी मुलाजिम ने शिनाख्त की।
घोटाले के बाद हुए सस्पेंड, जनवरी में बहाल
अप्रैल-13 में शिक्षा विभाग में लाइब्रेरी की किताबों में घोटाला सामने आया था। किताबों की खरीद के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी। डॉ. विनोद कुमार उसके सदस्य थे। घोटाला सामने आने के बाद तीनों सदस्य सस्पेंड कर दिए गए थे।
जनवरी-14 में डॉ. विनोद को बहाल करने के बाद शिक्षा विभाग में डिप्टी डायरेक्टर बनाया गया था। उन्हें शिक्षामंत्री सिकंदर सिंह मलूका का बेहद करीबी माना जाता था।
इस मामले की जांच को गठित जिंदल कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में मलूका को क्लीन चिट देते हुए कमेटी को दोषी ठहराया था। हालांकि राज्य सरकार ने न तो अभी रिपोर्ट सार्वजनिक की है और न ही उस पर कोई कार्रवाई की है।