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रेप केस में कारोबारी मंजीत दोषी करार, 12 साल कैद

Tue, 19 Nov 2013 12:34 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
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नाबालिग नौकरानी से दुराचार और जान से मारने की धमकी देने के मामले में बिजनेसमैन मंजीत अरोड़ा को दोषी करार देते हुए 12 साल की सजा सुनाई है।
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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नाजर सिंह की अदालत ने सोमवार को पीड़िता को एक लाख रुपये हर्जाना देने और अदालत में दस हजार रुपये जुर्माना जमा कराने के भी आदेश दिए।

अदालत ने मंजीत अरोड़ा को पीड़िता, शिकायतकर्ता व डॉक्टर के बयानों और मोबाइल से मिली वीडियो क्लिपिंग के आधार पर सजा सुनाई है।

अदालत में सोमवार को शिकायतकर्ता यानी पीड़िता की मां ने बयान भी दिए। वह अपने बयानों पर कायम रही।

सजा के लिए इन्हें माना आधार
पीड़िता की मां शिकायतकर्ता ने अदालत में कहा था कि उसकी बेटी को मंजीत अरोड़ा ने मुंबई में अपनी बेटी के पास काम करने के लिए भेजा था।

जब उसकी बेटी वापिस आई तो उसने मंजीत द्वारा दुराचार करने की बात कही। उसने कहा था कि मंजीत उसकी बेटी के पिता की उम्र का था और इसी कारण उस पर विश्वास करते हुए बेटी को नौकरी पर लगाया था। लेकिन, मंजीत ने उसका विश्वास तोड़कर नाबालिग बेटी से दुराचार की वारदात को अंजाम दिया।
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सेक्टर 16 जनरल अस्पताल के डॉक्टर ने अदालत में दिए बयानों में नाबालिग लड़की से दुराचार होने की पुष्टि की थी

पीड़िता ने धारा 164 के तहत बयानों में मंजीत अरोड़ा द्वारा दुराचार करने की बात कही थी लेकिन बाद में पीड़िता मुकर गई थी। कोर्ट ने पहले दिए गए बयानों को तरजीह दी।

पुलिस को मंजीत अरोड़ा के मोबाइल फोन में वीडियो फुटेज मिली थी जिसमें पीड़िता को रस्सी से बांधा हुआ था।

मुंबई में किया दुराचार
सात जनवरी 2010 को फैदा निवासी महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि सेक्टर 34 निवासी मंजीत अरोड़ा के पास अपनी बेटी को घर के काम के लिए नौकरी पर रखवाया था। मगर मंजीत ने उसे मुंबई निवासी अपनी बेटी के पास काम करने के लिए भेज दिया था।

महिला ने आरोप लगाया था कि इस दौरान मंजीत अरोड़ा मुंबई गया और उसने वहां उसकी बेटी से दुराचार किया। मां की शिकायत पर सेक्टर 34 थाना पुलिस ने मंजीत अरोड़ा के खिलाफ दुराचार का मामला दर्ज किया था।

यह भी पढ़ें: बाप मंजीत अरोड़ा गया जेल इधर बेटे पर केस

सुबह से ही तैनात थी पुलिस
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नाजर सिंह की अदालत के बाहर सोमवार सुबह से ही पुलिस जवान तैनात थे। दुराचार मामले में मंजीत अरोड़ा अदालत में गया तो जज ने उसे दोषी करार दे दिया।

इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। परिजनों ने जमकर हंगामा किया।

बचाव पक्ष के वकील रविंद्रा पंडित के अनुसार मंजीत अरोड़ा ने शिकायतकर्ता पर काफी दबाव बनाया था। यहीं नहीं 2011 में मेरे खिलाफ भी मंजीत ने सेक्टर 17 थाने में झूठी एफआईआर दर्ज करवाई। लेकिन बाद में सारी सच्चाई सामने आ गई थी। मंजीत के मोबाइल फोन से मिली फुटेज में सब कुछ साफ दिख रहा है।


मेरे पिता के साथ इंसाफ नहीं हुआ। मामले में पीड़िता बयानों से मुकर चुकी है जबकि मेडिकल रिपोर्ट में भी कुछ नहीं आया है। हम सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
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- सिकंदर, मंजीत अरोड़ा का बेटा

यह भी पढ़ें: रिश्वत मामले और दुराचार मामले की सुनवाई एक साथ

दो पर लगाए थे रिश्वत लेने के आरोप
डॉक्टर नरेश मित्तल और बलबीर सिंह पर भी मंजीत अरोड़ा ने रिश्वत मामले में आरोप लगाए थे। मंजीत ने कहा था कि वह मित्तल को 25 लाख रुपये रिश्वत दे चुका है। मंजीत का दावा था कि मित्तल ने यह रिश्वत एक जज के नाम पर मांगी थी।

7 जनवरी, 2010: फैदा निवासी महिला की शिकायत पर उसकी बेटी के साथ दुराचार मामले में मंजीत अरोड़ा पर सेक्टर 34 में मामला दर्ज

16 अप्रैल 2010- पुलिस ने मंजीत के खिलाफ जिला अदालत में दायर की चार्जशीट

10 अगस्त 2010- पीड़िता जिला अदालत में अपने बयानों से मुकरी

13 सितंबर 2013- अदालत ने मंजीत के खिलाफ जारी किए गैर जमानती वारंट

16 अक्तूबर 2012- मंजीत ने जिला अदालत में किया सरेंडर
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