ज्योति के पिता बूटी राम पिछले दिनों कोर्ट में भले ही अपने पूर्व बयान से पलट गए और होस्टाइल हो गए, लेकिन कोर्ट में उन्होंने माना है कि ज्योति अपनी छोटी बहन के नाम पर लिया हुआ सिम इस्तेमाल करती थी।
बूटी राम का यह बात स्वीकार करना पुलिस के लिए राहत की बात है, क्योंकि पुलिस ने भी इस केस में दाखिल चार्जशीट में कहा है कि ज्योति के पास दो सिम थे, जिनमें से एक उसकी बहन के नाम पर था, जबकि दूसरा खुद के नाम पर।
वारदात वाली रात बहन की आईडी वाला नंबर और रामकुमार चौधरी जो फर्जी आईडी पर लिया गया नंबर इस्तेमाल कर रहे थे, वे दोनों एक साथ चल रहे थे।
पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, ज्योति व इस वारदात के आरोपी विधायक सहित अन्य आरोपी दो-दो नंबर इस्तेमाल करते थे।
22 नवंबर 2012 को चंडीगढ़ के सेक्टर-21 में रामकुमार चौधरी के दोनों नंबर ज्योति के दोनों नंबर एक साथ थे।
इसके बाद चौधरी व ज्योति के ओरिजनल आईडी वाले सिम बंद हो गए, लेकिन ज्योति की बहन की आईडी वाला सिम और चौधरी का फर्जी आईडी वाला सिम एक साथ चलते रहे, जो पंचकूला सेक्टर-21 में मौका ए वारदात पर भी एक साथ थे।
वारदात में इस्तेमाल वाहनों की है फुटेज
पुलिस के पास इस वारदात में इस्तेमाल ऑल्टो कार व ट्रक की फुटेज भी है, जो 21 नवंबर 2012 को चंडीमंदिर टोल प्लाजा से पंचकूला में दाखिल हो रही है।
यह भी एक बड़ा सबूत है। हालांकि ट्रक और ऑल्टो मालिक कोर्ट में कह चुके हैं कि उनके वाहन वारदात में इस्तेमाल नहीं हुए।
ट्रक के मालिक अमरजीत सिंह ने कोर्ट में पिछले दिनों कहा था कि उसका ट्रक वारदात वाले दिन घर पर ही था, लेकिन पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक यह ट्रक पंचकूला आया था और उससे ज्योति का सिर कुचलने की कोशिश हुई थी, जिसे आरोपी तिलकराज चला रहा था।
पुलिस के पास ट्रक के पंचकूला में दाखिल होने की फुटेज भी है। इसके अलावा ऑल्टो आरोपी परमजीत उर्फ पम्मा चलाकर लाया था, लेकिन कोर्ट में ऑल्टो के मालिक लखविंद्र सिंह ने कहा कि उसने ऑल्टो किसी को नहीं बेची, वह उसके पास ही है। जबकि, पुलिस के पास ऑल्टो की फुटेज का एक अहम सबूत है।