इसके बाद परिजनों ने स्थानीय पुलिस व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की। लेकिन न तो पुलिस और न ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मामले के प्रति गंभीरता दिखाई। इसके बाद मामला कष्ट निवारण समिति की बैठक में चला गया। मीटिंग में राज्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को चिकित्सक दंपति पर केस दर्ज करने व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को जांच करने के निर्देश दिए।
राज्यमंत्री के आदेशों पर पुलिस ने केस दर्ज तो कर लिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। अंतिम बार परिजन अक्तूबर माह में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से मिले। स्वास्थ्य मंत्री ने पूरे मामले को जानने के बाद सरकार को चिकित्सक की लापरवाही से हुई महिला की मौत को देखते हुए सस्पेंशन के लिए पत्र लिख दिया। दो माह बाद सरकार ने कार्रवाई करते हुए महिला चिकित्सक को सस्पेंड करने के आदेश जारी किए हैं।
रिटायरमेंट के दिन मिला आरोपी का सस्पेंशन ऑर्डर
विभाग की ओर से चिकित्सक डा. सुभाषिनी जैन के सस्पेंशन के लिए जो पत्र जारी किया गया है, वो 31 दिसंबर का है। जबकि विभाग के अधिकारी अभी भी इस पत्र को पुख्ता सबूत नहीं मान रहे हैं। मजे की बात तो ये है कि महिला चिकित्सक ने रिटायरमेंट के लिए भी फाइल भेजी हुई थी। जिसके तहत गुरुवार 3 जनवरी को को महिला का अस्पताल में अंतिम कार्य दिवस था। इससे जाहिर होता है कि स्थानीय अधिकारियों ने चिकित्सक की रिटायरमेंट प्रभावित न हो, इसके लिए दो दिन तक सस्पेंशन के पत्र को लीक नहीं होने दिया।
-डा. सुभाषिनी के सस्पेंशन का पत्र उन्हें सांय 4 बजे प्राप्त हुआ है। आज ही महिला चिकित्सक की वीआरएस थी। सरकार की ओर से महिला चिकित्सक के सस्पेंशन का पत्र 31 दिसंबर को निकाला गया था। -डॉ. वीरेश भूषण, डिप्टी सिविल सर्जन सिविल अस्पताल