पठानकोट हमले के बाद हरियाणा में बार-बार बम धमाके किसी आतंकी हमले की साजिश की तरफ इशारा कर रहे हैं। बीते पांच माह में हरियाणा में तीसरी बार एक ही तरीके से पब्लिक ट्रांसपोर्ट (ट्रेन और बस) में हुए विस्फोट ने सुरक्षा और गुप्तचर एजेंसियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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पानीपत स्टेशन पर 15 जनवरी, 13 मई को पैसेंजर ट्रेनों में हुए धमाकों के बाद वीरवार को कुरुक्षेत्र में बस हुए विस्फोट की घटना के बाद एक बार फिर सुरक्षा कर्मियों की मुस्तैदी बढ़ा दी गई है। लेकिन पिछली घटनाओं की जांच में न तो रेलवे पुलिस और न ही एनआईए के हाथ कोई अहम सुराग हाथ लगे। हालांकि जनवरी में हुई घटना के बाद एनआईए ने भी मौके का जायजा लिया था। इस धमाके में सिमी के हाथ होने की आशंका जताई गई थी, लेकिन अब तक इस मामले में कोई अहम गिरफ्तारी नहीं हो सकी।
कुरुक्षेत्र में हुए धमाके बाद भी सरकार ने इस मामले की जांच में एनआईए का सहयोग लेने का फैसला लिया है। इससे पहले अंबाला से भारी मात्रा में आरडीएक्स की बरामदगी हो चुकी है, लेकिन अब तक सुरक्षा एजेंसियों को किसी आतंकी के इन घटनाओं में शामिल होने के पुख्ता सुबूत या उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। गौरतलब है कि वर्ष 2007 में समझौता एक्सप्रेेस में पानीपत के दीवाना रेलवे स्टेशन के पास धमाका हुआ था, जिसमें 68 यात्रियों की मौत हो गई थी।
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पहले भी हो चुकी है साजिश
दिल्ली पानीपत पैसेंजर ट्रेन में धमाका
- फोटो : अमर उजाला
एक फरवरी 1997 को पानीपत बस स्टैंड पर सहकारी समिति की एक बस में बम धमाका किया गया था, जिसमें एक यात्री की मौत हो गई थी और करीब 20 यात्री घायल हुए थे
18 फरवरी 2007 को समझौता एक्सप्रेस में जोरदार धमाका हुआ था, 69 यात्रियों की मौत
15 जनवरी 2016 को पानीपत से अंबाला जाने वाली पैसेंजर ट्रेन में पानीपत रेलवे स्टेशन पर टाइमर बम धमाका, कोई हताहत नहीं
12 मई, 16 को पानीपत रेलवे स्टेशन के यार्ड में दिल्ली से पानीपत पहुंची पैसेंजर ट्रेन में शंटिंग के दौरान बम धमाका
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पीले बैग में मिला सामान सबसे बड़ा सुराग
जिस बैग में बैटरी बम रखा गया था। वह और अन्य सामान बस से बाहर गिर गया था। जब सुरक्षा एजेंसी की टीम ने उस बैग को खंगाला तो उसमें कई विजिटिंग कार्ड मिले हैं। साथ ही उस पीले बैग में एक पैंट और एक निकर भी मिला है। जांच एजेंसी ने सभी सामान अपने कब्जे में ले लिया है। विजिटिंग कार्ड्स के बारे में सुरक्षा एजेंसी ने किसी भी तरह की जानकारी देने से इनकार कर दिया है।
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बस में लगे थे दो अलग-अलग बोर्ड
बस में दो अलग-अलग बोर्ड लगे थे। बस के आगे सोनीपत-चंडीगढ़ का बोर्ड लगा था, जबकि बस के पीछे दिल्ली जम्मू-कटरा का बोर्ड लगा हुआ था। ऐसा भी संभव है कि धमाका करने वाले ने पीछे का बोर्ड देखकर बस में बैग रख दिया हो। बताया जाता है कि जांच एजेंसी इस पहलू पर भी जांच करेगी।
सरकार के लिए चिंता की बात यह है कि इसी साल पानीपत रेलवे स्टेशन पर भी लो इंटेंसिटी बम से दो बार धमाके की घटनाएं हो चुकी हैँ। यह तीसरा मौका है जब चंद महीनों के अंदर हरियाणा में इस तरह की वारदात हुई है। फर्क बस इतना ही है कि इस बार धमाका करने वालों ने बस यात्रियों को निशाना बनाया। अब पुलिस मामले के तह तक जाने के प्रयास में जुट गई है। प्रदेश सरकार ने घटना की जांच के लिए एडीजीपी क्राइम के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया है। इसमें तीन एसपी भी शामिल किए गए हैं।
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मकसद सवालों के घेरे में :
पुलिस के मुताबिक धमाके में कम तीव्रता (लो-इंटेंसिटी) वाले देसी बम का इस्तेमाल किया गया हालांकि सूत्रों ने आईईडी (इंप्रोवाइस्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) होने की आशंका जताई है। पुलिस इस बात की भी छानबीन में जुटी है कि आखिरकार विस्फोट करने वाला शख्स बस में कहां सवार हुआ और उसका क्या मकसद था।
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डीजीपी ने बड़ी साजिश से किया इनकार :
हरियाणा पुलिस के डीजीपी केपी सिंह ने बताया कि डीजी क्राइम शत्रुजीत कपूर के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर दी गई है। मामले से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से छानबीन शुरू कर दी गई है। हालांकि पुलिस ने धमाके के पीछे किसी बड़े हमले की साजिश से इनकार किया है।
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इसी साल पानीपत में हुए दो धमाके
जनवरी में पानीपत रेलवे स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेन में धमाका हुआ था। मामले की छानबीन के लिए एनआईए की टीम भी पहुंची थी। इसके बाद करीब दो हफ्ते पहले भी पानीपत में ही एक और पैसेंजर ट्रेन में ऐसा ही धमाका हुआ, जिसकी छानबीन चल रही है।