जालंधर कमिश्नरेट पुलिस टीम ने अलीगढ़ (यूपी) में ऑपरेशन चलाकर मॉडल टाउन से अगवा किए गए गोपी को छुड़ा लिया। गोपी को अलीगढ़ के सिटी एरिया में रखा गया था। उसे छुड़ाने के लिए गिरोह के सदस्यों ने 15 लाख रुपये फिरौती की मांग रखी थी। पुलिस ने उनकी योजना पर पानी फेरकर तीन सदस्यों को काबू कर लिया है। आधा दर्जन सदस्य फरार चल रहे हैं।
जालंधर के पुलिस कमिश्नर यूरिंदर सिंह हेयर ने बताया कि 12 अक्तूबर को मॉडल टाउन इलाके से प्रॉपर्टी डीलर सतनाम सिंह के सात साल के बेटे गुरप्रीत सिंह का अपहरण कर लिया गया था।
केस को हल करने के लिए सीनियर आईपीएस अधिकारी डीसीपी नवीन सिंगला के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया था। टीम को जांच में कई सुराग मिले। इसके आधार पर पता चला कि गोपी को हाई प्रोफाइल गिरोह ने अगवा कर अलीगढ़ (यूपी) में रखा हुआ है। एक टीम डीसीपी सिंगला के नेतृत्व में वहां भेजी गई।
टीम ने एसटीएफ व यूपी के आला अधिकारियों के साथ मिलकर ऑपरेशन चलाया। अपहरणकर्ताओं पर दबाव बढ़ा तो उन्होंने गोपी को छोड़ दिया। पुलिस ने जालंधर के रहने वाले मोहिंदर गुप्ता, संजीव व सुरेश तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया है। कमिश्नर हेयर व डीसीपी सिंगला का कहना है कि इस गिरोह के कई सदस्य हैं जिन्हें गिरफ्तार किया जाना बाकी है।
गोपी को छुड़ाने पुलिस ने चलाया ऑपरेशन
अपहरण के छह दिन बाद अचानक सतनाम सिंह के पते पर एक कोरियर आया। इसमें एक ई-मेल आईडी लिखी हुई थी। कहा गया था कि गोपी का सुराग इस ई-मेल पर बात करने से मिल सकता है।
डीसीपी सिंगला ने तत्काल ई-मेल को परिवार वालों से ले लिया और खुद ऑपरेट करने लगे जबकि एक टीम एडीसीपी सिटी हरप्रीत मंडेर की अगुवाई में सिविल ड्रेस में मैदान में लगा दी गई। ई-मेल के साथ-साथ डीसीपी सिंगला ने सतनाम सिंह बनकर अपहरणकर्ता से मोबाइल पर भी बात की।
इसके बाद गोपी को रिहा करने के लिए 15 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई। डीसीपी सिंगला के मुताबिक पुलिस ने टेक्निकल टीम लगा रखी थी। इससे पता चला कि ई-मेल जालंधर के ईश्वरपुरी का रहने वाला मोहिंदर गुप्ता कर रहा है। फील्ड की टीम ने महिंदर गुप्ता के आसपास जाल बिछाया तो सामने आया कि मोहिंदर गुप्ता का संपर्क बस्ती दानिशमंदा के रहने वाले सुरेश व संजीव से हो रहा था।
सुरेश अलीगढ़ का ही रहने वाला है और वह तीन माह पहले ही पंजाब आया था। संजीव व सुरेश की बातचीत ट्रैक हुई तो पता चला कि गोपी इस समय अलीगढ़ इलाके में है। डीसीपी सिंगला ने टीम को तत्काल अलीगढ़ रवाना कर दिया गया। डीसीपी सिंगला के मुताबिक अलीगढ़ में 15 किमी का एरिया उन्होंने चिह्नित कर लिया था।
इसमें गोपी को रखे होने की संभावना थी। उसके बाद घेरा तंग होता गया और दो किमी इलाका चिह्नित हो गया। यूपी के एसटीएफ व कई आला अधिकारियों के साथ बैठक कर दो किमी इलाके में दो लोगों को हिरासत में लिया गया तो अपहरणकर्ताओं पर प्रेशर बन गया और उन्होंने गोपी को छोड़ दिया।
पहचान छिपाने के लिए केश कत्ल
गोपी की रिहाई के बाद सामने आया है कि अपहरणकर्ता मोहिंदर गुप्ता व एक कमल नामक (गिरफ्तार किया जाना बाकी है) युवक ने ही गोपी की किडनैपिंग का तानाबाना बुना था। मोहिंदर गुप्ता आईसीआईसीआई बैंक में कार्यरत था और कुछ समय पहले ही उसको निकाला गया था।
वह बेरोजगार था और तनाव में था। वह अकसर पार्क में जाकर बैठता था। वहां गोपी भी खेलने आता था। दोनों में दोस्ती हो गई। मोहिंदर गुप्ता ने अलीगढ़ के रहने वाले कमल को भी पार्क में ले जाना शुरू कर दिया। कमल व बच्चे गोपी के बीच भी दोस्ती बन गई। घटना वाले दिन कमल व मोहिंदर गुप्ता गोपी को कार में बैठाकर चिंतपूर्णी ले गए और वहां पर दो दिन धर्मशाला में रहे।
गोपी उनका दोस्त बन चुका था इसलिए शोर नहीं मचाया। कमल इस बीच एक बार जालंधर आया और उसके पिता सतनाम सिंह का नंबर लेकर वापस चिंतपूर्णी चला गया।
जहां से वापस आते वक्त गोपी के बाल कत्ल करवाए ताकि अलीगढ़ में उसको कोई पहचान न पाए। मोहिंदर गुप्ता जालंधर आकर परिवार से ई-मेल के जरिए संपर्क साधने लगा जबकि कमल बच्चे को लेकर अलीगढ़ चला गया। वहां पर उसको अपने रिश्तेदारों के परिवार के बीच ही रखा।