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ज्योति केस: प्रेग्नेंसी-मर्डर, सब सनसनीखेज

Thu, 11 Sep 2014 03:43 PM IST
विजय जैन/अमर उजाला,चंडीगढ़
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आम लड़कियों की तरह ज्योति भी पूरी तरह आत्मनिर्भर लड़की थी। मूलरूप से होशियारपुर से 21 किलोमीटर दूर गांव भूंगा में रहने वाली ज्योति चंडीगढ़ में पीजी में रहती थी। 9 दिसंबर 2009 को ज्योति की छोटी बहन इशु की शादी में विधायक रामकुमार चौधरी अपने एक अन्य साथी के साथ आए थे व शगुन के तौर पर 2100 रुपए भी दिए थे।
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यही नहीं, खुद ज्योति ने रामकुमार चौधरी से परिचय करवाने के दौरान बताया था कि चंडीगढ़ में जिस कंपनी में वह काम करती है, के चौधरी साहब चेयरमैन हैं। उस शादी में रामकुमार चौधरी ने 2100 रुपए व उनके साथी ने भी 1100 रुपए शगुन दिया था।

ज्योति के पिता का कहना है कि ज्योति चौधरी के इलेक्शन में खर्च का लेन-देन देख रही थी। ज्योति ने अपने पिता बूटी राम को आखिरी बार फोन करके कहा था कि वह राम कुमार चौधरी के साथ जा रही है। अगले दिन उसकी लाश मिली थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक ज्योति प्रैग्नेंट थी और उसका अवैध तरीके से अबॉर्शन करवाया गया था।
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22 नवंबर 2012 को मिला था ज्योति का शव

चंडीगढ़ में बतौर पीजी रहने वाली होशियारपुर की ज्योति का शव बीते वर्ष 22 नवंबर 2012 को पंचकूला के सेक्टर-21 में सड़क पर मिला था। उसके चेहरे पर गाड़ी चढ़ाकर पहचान मिटाने की कोशिश भी की गई थी। ज्योति का बाकी सामान तो था, लेकिन दोनों मोबाइल फोन नहीं मिले। इस मामले में युवती के पिता बूटी राम ने दून के विधायक राम कुमार चौधरी पर आरोप लगाए। इसके बाद विधायक राम कुमार और उनके साथी गुरमीत, धर्मपाल और परमजीत सिंह पर हत्या, धोखाधड़ी और एससीएसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।प्रैग्नेंट थी ज्योति, अवैध तरीके से कराया अबॉर्शनपोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक ज्योति प्रैग्नेंट थी और उसका अवैध तरीके से अबॉर्शन करवाया गया था। मोबाइल फोन डिटेल और टॉवर लोकेशन से खुलासा हुआ था कि मर्डर वाले दिन रामकुमार चौधरी भी हर उस जगह मौजूद थे। इसके अलावा पुलिस के पास ज्योति की बहन की शादी में राम कुमारचौधरी की मौजूदगी वाला भी एक फोटो है।
इस खुलासे के बाद से ही रामकुमार चौधरी फरार था। हत्या के 46 दिन बाद आरोपी विधायक राम कुमार चौधरी ने पंचकूला सीजेएम कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था। इस मामले में गुरुवार को पंचकूला पुलिस ने तीन अन्य आरोपियों धर्मपाल, गुरमीत और तिलकराज को गिरफ्तार किया हैं।

19 दिसंबर 2012: हाईकोर्ट पहुंचा मामला

पंचकूला ज्योति हत्याकांड का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। मामले की धीमी जांच को लेकर पंचकूला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट ज्येंद्र एस चंदेल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है।याचिका में हाईकोर्ट से आग्रह किया गया है कि 22 नवंबर को दर्ज किए गए ज्योति की हत्या के मामले की जांच तेज करने के निर्देश जारी किए जाएं, ताकि आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो सके।याचिका में कहा गया है कि 22 नवंबर को ज्योति की लाश पंचकूला सेक्टर-21 की सड़क पर मिली थी। किसी ने उसकी बेरहमी से हत्या कर उसका आधा मुंह कुचल दिया था।
पुलिस ने मामला दर्ज कर तफतीश शुरू की और कई अहम तथ्य इकट्ठे किए। इनमें बद्दी के एक नेता और उद्योगपति राम कुमार चौधरी का नाम भी शामिल है, जिन्होंने अपने प्रभाव में बद्दी स्थित आईसीआईसीआई की शाखा में ज्योति का अकाउंट खुलवाया था। इसके साथ ही कुछ स्थानीय लोगों के नाम भी सामने आए और पुलिस ने पंजाब और हिमाचल की कई जगह पर छापामारी भी की।18 मार्च 2013 को पंचकूला के बहुचर्चित ज्योति मर्डर केस में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने मामले की जांच से संबंधित सारे रिकार्ड को तलब किया है।

08 जनवरी 2013: 46 दिन बाद हत्थे चढ़ा आरोपी विधायक

ज्योति हत्याकांड के मुख्य आरोपी हिमाचल के नवनिर्वाचित कांग्रेस विधायक राम कुमार चौधरी ने हत्या के 46 दिन बाद 8 जनवरी को पंचकूला कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। राम कुमार हाल ही में हिमाचल विधानसभा चुनाव में दून हलके से जीते हैं।विधायक पर हरियाणा पुलिस ने दो लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। पुलिस ज्योति की हत्या के बाद लगभग डेढ़ माह से राम कुमार की तलाश में हिमाचल में छापे मार रही थी, लेकिन वे उनके हाथ नहीं लगे। पुलिस धर्मशाला में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में भी उनकी तलाश करती रही लेकिन वे वहां नहीं पहुंचे। इसके बजाय वे चुपके से सरदार के हुलिये में पंचकूला कोर्ट पहुंच गए।पुलिस ने इसलिए मांगा रिमांडपुलिस ने बताया कि आरोपी विधायक से हत्या में इस्तेमाल की गई गाड़ियां और मोबाइल बरामद करने हैं। इसके लिए कोलकाता, पुणे और हैदराबाद आदि शहरों में भी जाना है। हत्या की सही वजह जाननी है। ज्योति अगस्त 2012 में गर्भवती हुई थी और उसका गर्भपात करवाया गया था। इसमें किसका हाथ है?- बद्दी से ज्योति के एकाउंट में रुपये कौन ट्रांसफर करता था?

16 जनवरी 2013: कांग्रेस से निकाले गए विधायक चौधरी

ज्योति मर्डर केस में गिरफ्तार दून के विधायक राम कुमार चौधरी को कांग्रेस पार्टी से निलंबित कर दिया गया। कांग्रेस ने राम कुमार की प्राथमिक सदस्यता निलंबित करने के साथ-साथ उन्हें प्रदेश महासचिव के पद से भी हटा दिया है। हिमाचल कांग्रेस के अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि पार्टी में किसी भी तरह की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं होगी। राम कुमार पर दलित लड़की की हत्या का आरोप लगने से पार्टी की छवि खराब हुई है। सुक्खू ने कहा कि यह फैसला भले ही सख्त हो, लेकिन इस तरह की गतिविधियां बर्दाश्त ही नहीं की जा सकती।कौन है विधायक चौधरीरामकुमार चौधरी हिमाचल प्रदेश के दून विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते हैं। रामकुमार चौधरी के पिता लज्जा राम भी दून विधानसभा सीट पर कई बार कांग्रेस विधायक रह चुके हैं। ज्योति मर्डर केस का ही यह दबाव था कि रामकुमार चौधरी शिमला में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अगुवाई में बने कांग्रेसी मंत्रिमंडल के शपथग्रहण समारोह में भाग भी नहीं ले पाए थे।

22 दिसंबर 2013: बयान से पलटा बूटी राम

ज्योति मर्डर केस में फंसे हिमाचल के विधायक राम कुमार चौधरी को ज्योति के पिता बूटी राम ने पहचानने से इनकार कर दिया। जिससे राम कुमार चौधरी को राहत मिलने की उम्मीद और जाग गई। ज्योति मर्डर केस में 22 दिसंबर 2013 को बतौर गवाह ज्योति के पिता बूटी राम को बतौर गवाह अदालत में पेश किया गया।

अदालत में जब उन्हें पूछा गया कि क्या वह विधायक राम कुमार चौधरी को जानते हैं तो उन्होंने इस बात से साफ इनकार कर दिया। उन्हें अदालत में राम कुमार चौधरी की तस्वीर भी दिखाई गई लेकिन उन्होंने कहा कि वह इस शख्स को जानते ही नहीं हैं। वह इस मर्डर के मुख्य गवाह थे। उनके अपने बयान से मुकर जाने के बाद इस केस ने नया मोड़ ले लिया है।

ज्योति के मर्डर के आरोप में हिमाचल के विधायक रामकुमार आजकल जेल में बंद हैं। गौर हो कि पुलिस रिमांड के दौरान विधायक रामकुमार चौधरी ने ज्योति की हत्या करवाने का गुनाह कबूल कर लिया था और कहा था कि ज्योति की हत्या कार से नहीं, बल्कि ट्रक के कुचले जाने से हुई थी।

03 जनवरी 2014: 'परिवार को मारने की मिली थी धमकी'

ज्योति के पिता बूटीराम पिछले दिनों कोर्ट में क्यों मुकरे थे, इसका खुलासा शुक्रवार को उन्होंने खुद ही कर दिया। हरियाणा पुलिस के अधिकारियों के सामने उन्होंने कहा कि उसके पूरे परिवार को खत्म करने की धमकी देकर उसे अदालत में बयान से मुकरने को मजबूर किया गया।

23 दिसंबर को अदालत में पेशी से चंद घंटे पहले हथियारों से लैस कार सवार चार लोग उसे मोहाली ले गए और मामले के मुख्य आरोपी हिमाचल प्रदेश के कांग्रेसी विधायक रामकुमार के खिलाफ बयान देने पर पूरे परिवार को खत्म करने की धमकी दी। इन चार लोगों में एक महिला भी थी, जिसने खुद को विधायक रामकुमार की पत्नी बताया। पुलिस कमिश्नर ने इस मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए।

बूटीराम ने शुक्रवार को अपने वकील के साथ पुलिस कार्यालय में शिकायत दी। उन्होंने पुलिस कमिश्नर राजबीर देसबाल और डीसीपी अश्विन शेणवी से अनुरोध किया है कि धमकी देने वालों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए और उन्हें सुरक्षा दी जाए।

इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने बूटीराम से करीब एक घंटे तक बात भी की। बूटीराम के वकील ने बताया कि सुरक्षा के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे।

अभियोजन पक्ष की हो चुकी हैं गवाहियां

बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में शुक्रवार को सीएफएसएल चंडीगढ़ की दो डॉक्टर और सेक्टर-5 थाना प्रभारी के बयान के साथ ही अभियोजन पक्ष की गवाहियां बंद हो गईं।

कोर्ट ने प्रोसिक्यूशन एविडेंस क्लोज कर बचाव पक्ष की गवाहियां दर्ज कराने के आदेश दे दिए हैं। अब शनिवार से कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 313 के तहत मुख्य आरोपी विधायक रामकुमार चौधरी सहित सभी 12 आरोपियों के बयान दर्ज होंगे और पूरे केस के दौरान उनके खिलाफ आए सबूतों पर पक्ष जाना जाएगा।

ये थे मुख्य गवाह और पुख्ता सबूत

ज्योति की बहन और पिता बूटी राम। ज्योति की बहन कोर्ट में बयान दे चुकी है कि ज्योति ने उसे बताया था कि रामकुमार चौधरी के साथ उसके संबंध हैं और दोनों शादी करेंगे। वहीं, बूटी राम ने भी कोर्ट में ज्योति और रामकुमार के रिश्ते के बारे में बताया था।

मोबाइल की लोकेशन
ज्योति, रामकुमार व अन्य आरोपियों के मोबाइल वारदात वाले दिन साथ चल रहे थे। टावर लोकेशन के डिकोडेड डाटा में भी साफ हो गया है कि चंडीगढ़ से पंचकूला तक किस-किस टावर पर कैसे-कैसे नंबर एक साथ चले। कौन किस टावर से कहां तक पहुंचा।

चंडीमंदिर टोल प्लाजा की डिटेल्स
इसमें स्पष्ट है कि वारदात वाली रात वह ट्रक पंचकूला में आया था, जिससे ज्योति का सिर कुचला गया था।  

चौधरी के हस्ताक्षर
ज्योति का गर्भपात कराने के लिए मंजूरी फार्म पर साइन किए गए थे। ये साइन रामकुमार चौधरी के साइन थे, जो मैच हो चुके हैं।

ज्योति की कॉल डिटेल्स
हत्या के बाद डाटा डिलीट कर ज्योति के मोबाइल को फेंक दिया गया था। घग्गर नदी से मोबाइल रिकवर होने के बाद डाटा को रिट्राइव कराने पर पाया गया कि रामकुमार ने एक बार दो दिन में ज्योति को 40 फोन किए थे। ज्योति के मोबाइल से रामकुमार और उनकी पत्नी व एक जन्मदिन पार्टी की तस्वीरें भी रिट्राइव हो चुकी है।

एसएमएस
ज्योति के फोन से पुलिस को उसके नजदीकी दोस्त सिमी का पता चला। सिमी ने ज्योति को काफी एसएमएस कर रखे हैं। इनमें कुछ ऐसे एसएमएस हैं, जिनमें जिक्र है कि वह किसी और के लिए उसे छोड़ रही है। सिमी ने कोर्ट में बयान दिए हैं कि ज्योति ने उसे कहा था कि वह चौधरी के साथ है, जो उसकी काफी मदद करता है।

ज्योति के चरित्र पर सवाल उठाए

ज्योति हत्याकांड मामले में आरोपी दून के विधायक रामकुमार चौधरी को शनिवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रूपम सिंह की अदालत में पेश किया गया। विधायक ने सीआरपीसी की धारा 313 के तहत अदालत में बयान दर्ज कराए।

रामकुमार ने खुद पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसकी आईडी पर जो मोबाइल नंबर चल रहा था, उसे दोनों ड्राइवर इस्तेमाल करते थे। उसने ज्योति के चरित्र पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उसकी कई लोगों से जान पहचान थी और हत्या में किसी का हाथ हो सकता है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए सात जुलाई की तारीख तय की है।

मोबाइल टावर लोकेशन को आधार माना

शनिवार को अदालत में ज्योति हत्याकांड की सुनवाई हुई। इस हत्याकांड में पुलिस शुरुआत से ही मोबाइल टावर लोकेशन को आधार मान रही है। विधायक ने कोर्ट में कहा कि उसके ड्राइवर मोनू और सतपाल के पास मोबाइल नंबर-9216044340 होता था, जिसका सिम रामकुमार चौधरी के नाम से जारी कराया गया था।

पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक जिस रात ज्योति की हत्या हुई थी, उस रात 9816044340 और 9816464060 के मोबाइल लोकेशन लगातार बदल रहे थे। दूसरा नंबर विधायक की फर्जी आईडी पर खरीदा गया था।

हत्या में कोई भी शामिल हो सकता है

घटना की रात दोनों मोबाइल की लोकेशन घटनास्थल के आसपास थी। विधायक ने मोबाइल नंबर 9846464060 के बारे में कहा कि उन्हें नहीं पता कि यह नंबर किसके पास था और इस नंबर का इस्तेमाल कौन कर रहा थ, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। इस नंबर का उन्होंने कभी इस्तेमाल नहीं किया।

रामकुमार चौधरी ने ज्योति की जान पहचान कई लोगों से थी और ऐसे में उसकी हत्या में कोई भी शामिल हो सकता है। गवाह अनिल कुमार ने ज्योति को एक सिम कार्ड दिया था, जिसकी पुष्टि गवाह सुमित हंस उर्फ सन्नी भी कर चुके हैं।

ज्योति से कोई रिश्ता नहीं

विधायक ने कहा कि डीएसपी वीरेन्द्र सांगवान या कोई और जांच अधिकारी सहित ज्योति के पिता बूटी राम या बहन ईशू रानी भी अब तक ज्योति की कमाई के स्रोत के बारे में कुछ नहीं बता सके हैं।

ज्योति के मोबाइल नंबर पर हत्या के दिन (21 नवंबर, 2012) आखिरी कॉल किसने की या ज्योति ने इस नंबर से आखिरी कॉल किसे की इसका पता किया जाए ताकि हत्यारोपी तक पहुंचा जा सके। विधायक ने कहा कि उनका न तो ज्योति से कोई रिश्ता था और न ही उन्होंने उससे कभी शादी का वादा किया था।

कुलदीप कौर के साथ हुई थी शादी

विधायक ने बयान में कहा कि 1996 में कुलदीप कौर के साथ उनकी शादी हुई थी और उनके दो बच्चे हैं। ज्योति से शादी के बारे में उन पर लगाए गए आरोप झूठे हैं। ज्योति की बहन ईशू की ओर से विधायक पर लगाए गए ज्योति के रिश्ते के बारे में उन्होंने कहा कि एसआईटी के समक्ष वह एक गवाह के तौर पर थी, जिसके बयानों पर विश्वास नहीं किया जा सकता है।

चौधरी ने अदालत में कहा कि 9816044340 का इस्तेमाल उसके दोनों ड्राइवर करते थे। 21 नवंबर को भी ड्राइवर सतपाल इस मोबाइल को लेकर कहीं और था, जबकि वह 20-21 नवंबर की रात हरिपुर संधोली, बद्दी में अपने घर पर थे। मौका ए वारदात से मिले सबूतों को अब तक सिद्ध नहीं किया जा सका है।

और दोनों ने ही खुद को बेकसूर बताया

बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में शुक्रवार को दो आरोपियों ने कोर्ट में बयान दर्ज कराए। आरोपी ट्रक ड्राइवर तिलकराज व चार्जशीट के मुताबिक विधायक रामकुमार चौधरी के साथ गाड़ी में मौजूद परमजीत उर्फ पम्मा के बयान दर्ज हुए और दोनों ने ही खुद को बेकसूर बताया।

परमजीत ने तो यहां तक कह दिया कि वह तिलकराज को जानता ही नहीं है। कुल मिलाकर अब तक पांच आरोपियों के बयान दर्ज हो चुके हैं और सबने खुद को निर्दोष बताया है। अब 14 जुलाई को अन्य आरोपियों के बयान दर्ज होंगे।

तिलकराज का बयान और उसके खिलाफ साक्ष्‍य

तिलक राज ने कहा कि वह बेकसूर है और इस केस से जुड़े किसी व्यक्ति से उसका संबंध नहीं है। उसके पास न तो ड्राइविंग लाइसेंस है और न ही वह ड्राइवर है। ट्रक के मालिक अमरजीत ने कोर्ट में दिए अपने बयान में कहीं जिक्र नहीं किया कि मैं उसके ट्रक पर ड्राइवर हूं।

अमरजीत कोर्ट में यह भी कह चुका है कि वारदात वाली रात उसका ट्रक बद्दी में था। ट्रक पंचकूला गया ही नहीं। ज्योति की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी आया है कि उसके सिर से कोई भारी वाहन निकालने की कोशिश की गई, लेकिन कहीं साफ नहीं है कि वह ट्रक ही था।

पुलिस चार्जशीट के मुताबिक, तिलकराज मोबाइल नंबर 9882239372 इस्तेमाल कर रहा था। यह नंबर अन्य आरोपियों के साथ वारदात वाले दिन चल रहा था। परमजीत ने इसी नंबर पर फोन करके ट्रक को बद्दी से मंगाया था। इसके अलावा चंडीमंदिर टोल प्लाजा का भी रिकार्ड है, जिसमें वारदात वाली रात ट्रक पंचकूला में आया। हालांकि, रिकार्ड में सिर्फ आखिरी चार नंबर आते हैं और वह नंबर वारदात में इस्तेमाल हुए ट्रक का ही है।

परमजीत उर्फ पम्मा का बयान

परमजीत ने कोर्ट में कहा कि वह तिलक राज को जानता ही नहीं है। उसने कभी 9882239372 पर फोन नहीं किया। पुलिस के पास सबूत नहीं है कि 9882157080 नंबर उसका है।

पुलिस केस के मुताबिक अमरजीत का भाई परमजीत है। बंटवारे में ट्रक परमजीत के पास आया था और उसे वही इस्तेमाल करता था। वारदात वाले दिन परमजीत ऑल्टो कार से पंचकूला आया था।

इसके बाद रामकुमार व अन्य लोगों से मिला। ट्रक भी पंचकूला में परमजीत के कहने पर आया था।

7 आरोपियों के बयान दर्ज, खुद को बताया बेकसूर

बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में सोमवार को सात आरोपियों ने बयान दर्ज कराए और एयरटेल कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर, रिटेलर और मुख्य आरोपी रामकुमार चौधरी के भाई सहित सभी ने खुद को बेकसूर बताया।

विधायक राम कुमार चौधरी का भाई हरभजन चौधरी जहां रामकुमार को पनाह देने का आरोपी है, वहीं निर्मल सिंह, बलजीत सिंह व कमलजीत सिंह पर भी आरोपी परमजीत उर्फ पम्मा को छिपाने के आरोप हैं। अब इस केस में सभी आरोपियों के बयान दर्ज हो चुके हैं। अब बचाव पक्ष अपने गवाहों की सूची कोर्ट में देगा, फिर जिरह शुरू होगी।

रामकुमार को नहीं जानते, पनाह देने की बात गलत

सोमवार को अपने बचाव में रामकुमार के भाई हरभजन चौधरी ने कहा कि रामकुमार को पनाह देने की बात गलत है। इस मामले में वह बेकसूर है।

वहीं, आरोपी पंकज भंडारी ने कहा कि वह न तो रामकुमार चौधरी को जानता है और न ही बब्लू कम्यूनिकेशन का मालिक है। अगर सिम फर्जी पते पर बेचे गए हैं, तो कंपनी को उन्हें बंद करना चाहिए था। अभी तक नंबर बंद नहीं हुए हैं।

दुकान पर काम करने वाले आशीष ने कहा कि वह रामकुमार व उसके ड्राइवर सतपाल को नहीं जानता। उसने इस नंबर के सिम भी नहीं बेचे हैं।

उधर, एयरटेल कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर सतीश कौशल ने कहा कि उसे एयरटेल कंपनी ने नियुक्त किया था। उसने आगे किसी रिटलेर को नियुक्त नहीं किया है। बब्लू कम्यूनिकेशन को भी एयरटेल ने ही नियुक्त किया है।

पुलिस के पास मजबूत सबूत

पुलिस केस के मुताबिक, बद्दी स्थित बब्लू कम्यूनिकेशन से फर्जी पते पर 9416464060 व 9882239372 खरीदे गए थे। दोनों ही नंबर वारदात वाले दिन मौका-ए-वारदात पर हैं और साथ में रामकुमार चौधरी के असली आईडी का नंबर भी है। पुलिस ने फर्जी नंबरों से जुड़ा जो रिकार्ड कब्जे में लिया है, उसके एक्टीवेशन फार्म पर भी बब्लू कम्यूनिकेशन की मुहर है।

प्रापर्टी डीलर ने कहा, वारदात के दिन साथ थे चौधरी

बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में सोमवार को एक नया मोड़ आ गया। बचाव पक्ष के एक गवाह प्रापर्टी डीलर ने कोर्ट में कहा कि वारदात वाले दिन रामकुमार चौधरी उसके साथ था।

उसने एक जमीन का सौदा किया और बाद में विधायक को उसने ही घर छोड़ा था। खास बात यह है कि प्रापर्टी डीलर कोर्ट में वह समय नहीं बता सका, जब उसने विधायक को घर छोड़ा था।

पुलिस के मुताबिक, वारदात वाले दिन पंचकूला में थे रामकुमार

पुलिस फोन रिकार्ड के मुताबिक कोर्ट में पहले ही दस्तावेज दे चुकी है कि रामकुमार चौधरी वारदात के वक्त पंचकूला में था। असली आईडी का फोन नंबर, फर्जी आईडी का फोन नंबर व ज्योति के नंबर के अलावा अन्य आरोपियों के नंबर भी साथ-साथ पंचकूला में चल रहे थे।

प्रापर्टी डीलर जसविंद्र के अलावा बचाव पक्ष से तीन अन्य लोगों ने भी अपने बयान दर्ज कराए। जसविंद्र ने कोर्ट में कहा कि वह रामकुमार चौधरी व बग्गा के साथ नालागढ़ में किसी जमीन के सौदे के लिए गया था।

वारदात वाले दिन ही उसने नालागढ़ में जमीन की रजिस्ट्री कराई थी। इसके बाद वह खुद विधायक को बद्दी में घर पर छोड़कर आया था।

छह सितंबर के बाद कोर्ट का फैसला

बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में बचाव पक्ष की गवाहियां खत्म हो गईं। दलील में जिसे जिम्मेदार माना जा रहा है, वह अब तक गायब है। हरियाणा के पंचकूला में चार जुलाई को कोर्ट ने प्रोसिक्यूशन एविडेंस क्लोज कर बचाव पक्ष की गवाहियां शुरू कराई थी।

अब मुख्य आरोपी राम कुमार चौधरी व अन्य के खिलाफ आए सबूतों व उनके बचाव में आई गवाहों की दलीलों पर छह सितंबर को बहस होगी और उसके बाद अदालत अपना फैसला सुनाएगी।

बचाव पक्ष की गवाहियों में अभी तक सामने आया कि वारदात का जिम्मेदार पूरी तरह से सतपाल को ठहराया जा रहा है, जो रामकुमार चौधरी का ड्राइवर था। सतपाल इस केस में कभी गिरफ्तार ही नहीं हुआ। उसका फिलहाल तक कोई पता-ठिकाना नहीं है।

बचाव पक्ष के मुताबिक, मोबाइल नंबर 98160-44340 सतपाल इस्तेमाल करता था, जबकि पुलिस केस के मुताबिक यह नंबर राम कुमार चौधरी की आईडी पर है और वारदात वाले दिन सेक्टर-21 में था। इसके साथ अन्य आरोपियों के नंबर भी चल रहे थे।
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बचाव पक्ष के गवाह का बयान

जसविंद्र सिंह नाम के प्रापर्टी डीलर ने कोर्ट में कहा कि 21 नवंबर 2012 को राम कुमार चौधरी उसके साथ था और एक प्रापर्टी का सौदा किया था। शाम तक दोनों साथ थे और सतपाल ड्राइवर ने घर छोड़ा था।

वहीं, माजिद खान नाम के एक अन्य गवाह (जो चौधरी के भट्ठे पर काम करता था) ने कोर्ट में बयान दिया कि वारदात वाले दिन सपताल से उसकी बात हुई थी। रात को साथ में डिनर करना था, लेकिन सपताल नहीं आया। जब उसे करीब साढ़े बारह बजे फोन किया तो उसने कहा कि वह बाहर है।

माजिद खान ने कहा कि सतपाल से उसकी बात 98160-44340 पर हुई थी। एक अन्य गवाह प्रवीण अग्रवाल ने कहा कि उसने 21 नवंबर की रात 98160-44340 पर फोन किया था, तो सतपाल ने रिसीव किया था।

चार्जशीट में पुलिस ने 98164-64060 नंबर का जिक्र किया है, जो फर्जी आईडी पर था, लेकिन इस्तेमाल चौधरी करता था। टावर लोकेशन के मुताबिक दोनों नंबर एक साथ चले।
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