बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में चल रहे ट्रायल के दौरान सोमवार को तीन गवाहों का क्रॉस एग्जामिनेशन हुआ, जिनमें एक गवाह को अगली तारीख तक डैफर (बाकी गवाही अगली तारीख को) कर दिया गया। दिल्ली की उस लैब के डॉक्टर भी अपने बयान दर्ज कराने पहुंचे, जहां से टायरों के सैंपल का मिलान हुआ था।
डॉ. आरके रैना ने सैंपल की जांच रिपोर्ट में बताया था कि टायर किसी भारी वाहन के हैं, लेकिन अब कोर्ट में जस्टिफाई नहीं कर पाए कि भारी वाहन कौन सा था? उन्होंने कहा कि भारी वाहन की कैटेगरी को जस्टिफाई करना मुश्किल है।
हालांकि उन्होंने कोर्ट में कहा कि उनकी लैब में जले हुए टायरों के टुकड़े आए थे, जिसकी जांच करने पर पाया गया कि ये टायर किसी भारी वाहन के ही हैं। बचाव पक्ष के एक सवाल में डा. रैना उलझ गए। जब उनसे पूछा गया कि उन टुकड़ों में से कोई धातु मिली थी? इस सवाल के जवाब में उन्होंने किसी भी तरह की धातु से इनकार किया।
वहीं, एक अन्य गवाह सेक्टर-5 थाना के तत्कालीन रिकॉर्ड मुंशी बरखा राम ने भी अपने बयान दर्ज कराए। जिसमें केस से संबंधित रिकॉर्ड कब्जे में लेने या किसी तरह की रिपोर्ट रिसीव करने पर क्रॉस किया गया। इसके अलावा करनाल मधुबन स्थित लैब से डॉ. कांता मलिक की क्रॉस एग्जामिनेशन पूरा नहीं हो सका, जिसे 16 अप्रैल तक डैफर किया गया है। कांता मलिक ने हस्ताक्षरों के मिलान संबधी नमूनों की रिपोर्ट तैयार की थी।
क्या है टायर के टुकड़ों का मसला
दरअसल, पुलिस केस के मुताबिक ज्योति की हत्या के बाद उसका चेहरा कुचलने के लिए उसके चेहरे पर ट्रक चढ़ाया गया था। बाद में ट्रक के टायरों को जला दिया गया।
पुलिस ने जले हुए टुकड़े रिकवर कर दिल्ली की एक लैब में भेजे थे, जिसकी पिछली दिनों ही रिपोर्ट आई कि ये टुकड़े भारी वाहन के हैं। हालांकि, मधुबन लैब इन टुकड़ों पर कोई स्पष्ट रिपोर्ट नहीं दे पाई थी।