मामला पंजाब के बटाला का है, जहां के गांव गुजरपुरा में जूडो की राष्ट्रीय खिलाड़ी और सैनिक की बहन कुलदीप कौर (25) ने मंगलवार की देर शाम को कोई जहरीली चीज निगल कर आत्महत्या कर ली। मृतका के पारिवारिक सदस्यों का आरोप है मारपीट के आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से कुलदीप कौर मानसिक तौर पर परेशान थी, जिसकी वजह से उसने अपना जीवन समाप्त कर लिया। वहीं पुलिस थाना घन्नियां के बांगर ने सुसाइड के लिए मजबूर करने के आरोपों में दस लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
बुधवार को बटाला के सिविल अस्पताल में मृतका के भाई सैनिक सतवंत सिंह ने बताया कि वह असम राइफल यूनिट में है औैर इस समय वह अरुणाचल प्रदेश में तैनात है। उसकी दूसरी बड़ी बहन बलवीर कौर की 8 जनवरी को शादी है और वह शादी के काम के सिलसिले में गुरदासपुर गया था।
मंगलवार की देर शाम को उसकी छोटी बहन कुलदीप कौर घर में अकेली थी और उसके साथ उसकी एक भांजी भी थी। मंगलवार की देर शाम को उसे भांजी का फोन आया कि कुलदीप कौर ने जहरीला पदार्थ निगल लिया है और उसकी हालत गंभीर होती जा रही है। वह गांव पहुंचा और उसे अमृतसर के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचा, जहां उसकी मौत हो गई।
पुलिस पर से विश्वास उठ गया: सतवंत सिंह
सिविल अस्पताल में अपनी दास्तां सुनाते सैनिक सतवंत सिंह और उसकी बहन बलवीर कौर।
सतवंत सिंह ने बताया कि करीब दो महीने पहले गांव के लोगों से जमीन को लेकर झगड़ा हुआ था। विपक्षियों ने उसकी मां और उसकी बहन कुलदीप कौर को पीटकर घायल कर दिया था। थाना घन्नियां के बांगर में दूसरे पक्ष के लोगों पर मामला दर्ज हुआ था।
सतवंत सिंह ने आरोप लगाया कि आरोपियों की ऊंची पहुंच के कारण पुलिस नामजद आरोपियों को गिरफ्तार नही कर सकी। जब वह और उसके पारिवारिक सदस्य बाहर जाते तो नामजद आरोपी उन पर तंज कसते और उनका मजाक उड़ाते। पुलिस की इस कारगुजारी से उसकी बहन कुलदीप कौर परेशान थी। इसीकी वजह से मानसिक तौर पर परेशान होकर उसने सुसाइड कर लिया।
थाना घन्नियां के बांगर के एसएचओ ने परमजीत सिह ने बताया कि मृतका कुलदीप कौर की बड़ी बहन बलवीर कौर के बयानों पर दस लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी अजायब सिंह, प्रगट सिंह और निंदरपाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। अन्य आरोपियों की तलाश में छापामारी की जा रही है।
पुलिस पर से विश्वास उठ गया: सतवंत सिंह
सतवंत सिंह ने बिलखते हुए कहा कि उसे पुलिस पर मात्र भर भी विश्वास नहीं रहा है। आज से एक फौजी का पुलिस पर से विश्वास उठ गया है। पुलिस प्रशासन के आसरे अपने परिवारों को छोड़ कर हम लोग बार्डर पर देश की रक्षा में लग रहते हैं। अब उसे कोई बताए कि वह अपनी बहन कहां से लाए।