जस्सी के परिवार के लोग इस शादी से सहमत नहीं होंगे, इसलिए दोनों ने 15 मार्च 1999 में प्रेम विवाह कर लिया। जैसे परिवार को इसकी भनक लगी वह जस्सी को वापस कनाडा ले गए। कुछ दिन बाद मिट्ठू पर जस्सी को अगवा करने का मामला दर्ज करवा दिया गया। पुलिस ने मिट्ठू को गिरफ्तार कर लिया। इसी दौरान कनाडा से जस्सी ने किसी तरह पंजाब पुलिस को फैक्स के माध्यम से यह बता दिया कि उसे अगवा नहीं किया गया है और मिट्ठू के साथ उसने प्रेम विवाह किया है।
इसके बावजूद पुलिस ने मिट्ठू को नहीं छोड़ा। जस्सी ने कनाडा पुलिस की सहायता ली और वर्ष 2000 में भारत लौट आई। यहां आने के बाद उसने मिट्ठू को पुलिस के चंगुल से आजाद करवाया। दोनों एक साथ रहने लगे। 20 मई 2000 को मिट्ठू और जस्सी स्कूटर पर मलेरकोटला के गांव नारीके से आ रहे थे। इसी दौरान सात हथियारबंद लोगों ने उन दोनों पर हमला कर दिया।
इस हमले में जस्सी की मौत हो गई, लेकिन मिट्ठू किसी तरह से बच गया। इसके बाद बरनाला पुलिस ने मृतक जस्सी की मां मलकीत कौर, मामा सुरजीत सिंह बदेशा, पंजाब पुलिस इंस्पेक्टर जगविंदर सिंह सहित सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
अदालत ने इंस्पेक्टर जगविंदर सिंह सहित अन्य को उम्र कैद की सजा सुनाई थी लेकिन जस्सी की मां मलकीत कौर और मामा सुरजीत सिंह कनाडा में होने के कारण गिरफ्तार नहीं हो सके। मिट्ठू 18 साल से दोषियों को सजा दिलाने के लिए अपनी लड़ाई जारी रखे हुए थे। इसी का नतीजा है कि कनाडा पुलिस ने दोनों को भारत डिपोट कर दिया है।
मृतका की आरोपी मां मलकीत कौर सिद्धू और उसके मामा सुरजीत सिंह बदेशा को 25 जनवरी को मालेरकोटला की अदालत में पेश किया जाएगा। यह जानकारी एसएसपी डॉ. संदीप गर्ग ने दी। इस कत्ल मामले में मालेरकोटला की अदालत ने नौ आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया था। इसमें से 21 अक्तूबर 2005 को अतिरिक्त सेशन जज इंद्रजीत सिंह वालिया की अदालत ने छह को दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुना दी थी।