एक महिला पति को छुड़ाने के लिए गई थी, एक महीने के मासूम बेटे का शव लेकर लौटी। लूट के एक मामले में पुलिस द्वारा पकड़े गए एक युवक को छुड़वाने के लिए रातभर उसकी पत्नी मासूम बेटे को लेकर चौकी के सामने बैठी रही। 6 डिग्री तापमान में ठंड के कारण मासूम ने पुलिस के दर पर ही दम तोड़ दिया।
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महिला अपने पति को तो पुलिस से छुड़ा नहीं पाई, लेकिन एक माह के मासूम की जान गवां बैठी। इस पूरे मामले का जिम्मेदार अब वह पुलिस को बता रही है। उसका आरोप है कि पुलिस ने उसके पति को झूठा फंसाया है। उसने किसी तरह की लूट की वारदात नहीं की।
मामले को लेकर रविवार दोपहर को मृत बच्चे को लेकर युवक की पत्नी व मां परिवार सहित एसपी आवास के सामने जाकर बैठ गए। न्याय नहीं मिलने पर पीड़ित परिवार शाम को फिर से एसपी आवास पर धरने पर बैठ गया।
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यह है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार शनिवार रात पारिजात चौक के पास गांव बीड़ बबरान का सिंकदर नाम का व्यक्ति गांव खरकड़ा से हिसार रेलवे स्टेशन पहुंचा। युवक धोक लगाकर वहां से आया था। रात करीब साढ़े 10 बजे वह पैदल ही बस स्टैंड की तरफ चल दिया।
सिकंदर ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि चार युवकों ने उसे बीच रास्ते रुकवाकर 25 सौ रुपये लूट लिए। वे आपस में एक दूसरे को गोल्डी, रवि, कालिया व विशाल नाम से पुकार रहे थे। पुलिस ने जब उनका पीछा किया तो जहाजपुल निवासी गोल्डी नाम का युवक पकड़ा गया।
उधर, पत्नी प्रीत और मां गुरमीत कोर का आरोप है कि उनके यहां एक महीने पहले लड़का हुआ था। गोल्डी के दोस्तों ने शाम को फोन किया कि उससे पार्टी लेंगे। पार्टी करने के लिए गोल्डी उनके साथ बीकानेर चौक पर चला गया।
रात को जब एक व्यक्ति के किसी ने रुपये छीन लिए तो पुलिस पीसीआर गश्त करते हुए बीकानेर चौक की तरफ चली गई। शराब पी रहे उसके तीन दोस्त पुलिस के डर से भाग गाए और गोल्डी वहां से नहीं भागा। पुलिस ने उसे वहां से पकड़ लिया और मारपीट करते हुए वे उसे ले आए।
छोड़ने के लिए पुलिस वालों ने 20 हजार मांगे
महिला का आरोप है कि तीन पुलिस कर्मी मौके पर आए और उन्होंने उसे छोड़ने की एवज में 20 हजार रुपये की मांग की। पत्नी व मां ने रुपये नहीं होने की बात कही तो वे उसे घर से ले जाने लगे। जब उन्होंने विरोध किया तो एक काले रंग का चश्मा लगाए हुए पुलिस कर्मचारी ने उसे हॉकी से मारा। वे पुलिस के पीछे-पीछे परिवार रहित डोगरान मोहल्ला चौकी पहुंच गईं।
गोल्डी की पत्नी प्रीत का आरोप है कि जब उसने अंदर जाने की कोशिश की तो उन्होंने कहा कि 20 हजार नहीं है तो 25 सौ रुपये तो होंगे ही, ले आओ इसे छोड़ देंगे। महिला प्रीत अपनी ननद के पास गई और उससे 15 सौ रुपये लेकर आई। उन्होंने 15 सौ रुपये ले लिए और फिर एक हजार और लाने की बात कही।
महिला किसी और से रुपये लेने के लिए गई, लेकिन उसे रुपये नहीं मिले। महिला का कहना है कि शायद उसके बेकसूर पति को वे छोड़ दें, इस आस में वह अपने एक महीने के मासूम को लेकर सास के साथ पूरी रात चौकी के सामने बैठी रही, लेकिन ठंड में उसके बच्चे ने दम तोड़ दिया।
युवा व्यापार मंडल अध्यक्ष अमन शर्मा ने कहा कि रात में गोल्डी की मां एक बजे 1 हजार रुपये मांगने के लिए आई थी। उसने कहा कि गोल्डी को पुलिस ने पकड़ लिया है। वह उसे झूठे केस में फंसाना चाहती है। पुलिस छोड़ने की एवज में रुपये मांग रही है, उसे एक हजार रुपये दे दो। अमन का कहना है कि वह खुद चौकी आया। क्योंकि गोल्डी कभी ऐसा नहीं कर सकता। वह सात साल तक मेरी शॉप पर रह चुका है। हर रोज 50 हजार का गल्ला उठता था, उसने कभी एक रुपये की हेराफेरी नहीं की।
बहन बोली, रात को मैंने दिए 15 सौ रुपये गोल्डी की बहन मंजीत ने एसपी आवास के सामने एसएचओ देवेंद्र नैन के समक्ष कहा कि रात को मां 15 सौ रुपये लेकर गई थी। उसने कहा कि पुलिस को देने हैं। पुलिस ने गोल्डी को तो झूठा फंसाया ही है और उसके मासूम बेटे की मौत की जिम्मेदार भी है।
बिलखती मां बोली, पिता ही करेंगे बच्चे का अंतिम संस्कार जब महिला का परिवार एसपी आवास के सामने जाकर बैठ गया तो सिटी थाना और सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामला शांत करने की कोशिश की। पुलिस ने गोल्डी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया।
परिजनों ने उसे छोड़ने की मांग की, ताकि बच्चे का अंतिम संस्कार किया जा सके। जब परिजनों को मामले का पता चला तो वे थाने से वापस एसपी आवास पर लौट आए। बिलख रही मां बोलीं, बच्चे का अंतिम संस्कार तभी होगा, जब उसके पिता आएंगे।