8 साल पुराने मामले में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को माफी दिए जाने से सिख संगठन नाराज हैं। अकाल तख्त पर आरोप लगे हैं।
हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष सरदार जगदीश सिंह ने कहा कि गुरमीत राम रहीम को सार्वजनिक तौर पर माफी देकर अकाल तख्त के जत्थेदारों ने सिक्ख कौम को मिट्टी में मिलाने का काम किया है। इस फैसले से पूरी सिख कौम निराशा में डूब गई है।
करनाल में डेरा कार सेवा में पत्रकार वार्ता के दौरान झींडा ने कहा कि इस फैसले से प्रदेश और देश की सिक्ख कौम ही नहीं बल्कि विदेशों में बैठे सिखों को भी आघात पहुंचा है।
झींडा ने कहा कि इतिहास की तरफ अगर नजर दौड़ाई जाये तो शेरे-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह को भी अकाल तख्त पर पेश होना पड़ा था। उन्हें उस वक्त के जत्थेदार अकाली फूला सिंह ने सजा दी थी, परंतु आज के जत्थेदारों ने हैरानीजनक फैसला देते हुए पूरी कौम को हैरान कर दिया है।
न तो डेरामुखी स्वयं अकाल तख्त पर पेश हुए और न ही बाबा ने माफी मांगी है। इससे साबित होता है कि डेरामुखी महाराजा रणजीत सिंह से भी बड़े हो गए हैं।
बादल की शह पर माफी देने का आरोप
अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार प्रो. दर्शन सिंह खालसा, जोगिन्द्र सिंह स्पोक्समैन तो अकाल तख्त पर पेश भी हुए थे, इनको पंथ से निष्कासित कर दिया गया। स्वयं मुझे भी अकाल तख्त पर पेश होने के बावजूद सिक्ख पंथ से निष्कासित कर दिया गया, लेकिन गुरमीत राम रहीम के मामले में जत्थेदारों की दोगली नीति केवल बादल को खुश करने के लिये अपनाई गई है।
झींडा ने कहा कि मैं अकाल तख्त के जत्थेदार व तख्तों के जत्थेदारों से पूछना चाहता हूं कि श्री अकाल तख्त साहिब सिक्खों के छठे गुरु हरगोबिंद साहिब ने बनाया है या बादल ने बनाया है, जिसकी शह पर पूरी सिख कौम को गुमराह व नीचा दिखाने वाले फैसले सुनाए जा रहे हैं।
गुरु हर गोबिंद साहिब ने अकाल तख्त की स्थापना करके सत्य और न्याय की ध्वजा फहराई थी, परंतु आज के जत्थेदार सत्य और न्याय की नीति को त्याग कर बादल को ही सब कुछ मान बैठे हैं। आज के तख्तों के जत्थेदार हमेशा बादल को खुश करने के लिये अपनी कौम के विद्वानों व बुद्धिजीवियों के लिये अलग रवैया अपनाते आये हैं।
उन्होंने कहा कि सभी सिख जत्थे बंदियों को सरबत खालसा बुलाकर अकाल तख्त के जत्थेदार व तख्तों के जत्थेदारों से इस्तीफा मांगना चाहिये। इस मौके पर जिला प्रदेश महासचिव अंग्रेज सिंह पन्नु, जसविन्द्र सिंह बिल्ला, रंजीत सिंह आदि उपस्थित थे।