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बेअंत के हत्यारे तारा का नया सच जान चौंक जाएंगे

Wed, 07 Jan 2015 12:28 PM IST
सुरिंदर पाल/अमर उजाला, जालंधर
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दिल्ली में टैक्सी ड्राइवर रह चुके आतंकवादी जगतार सिंह तारा का मुख्य टारगेट दिल्ली दंगों के आरोपी सज्जन कुमार को खत्म करना था। वह सज्जन कुमार को सिख दंगों का मुख्य आरोपी मानता था। इसलिए उसने सज्जन कुमार की हत्या की साजिश रचकर वर्ष 2011 में बब्बर खालसा को अलविदा कहकर पाकिस्तान में अपने नए आतंकी संगठन खालिस्तान टाइगर फोर्स का गठन किया था।
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खालिस्तान टाइगर फोर्स का स्वयंभू कमांडर भी बनाया और अपना नेटवर्क जेएंडके से लेकर यूके तक तैयार फैला दिया। तारा बब्बर खालसा से कभी अलग नहीं होना चाहता था लेकिन यूरोप में बसे बब्बर खालसा आतंकवादियों से वधावा सिंह का तालमेल नहीं था। इसलिए वर्ष 2011 में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने तारा का अलग गुट तैयार करने का फैसला लिया।

सज्जन कुमार को मारना था मुख्य उद्देश्य

वर्ष 2011 में जगतार सिंह तारा ने पाकिस्तान में अपना संगठन तैयार किया था और उसका पहला टारगेट सज्जन कुमार था। तारा का मानना था कि सज्जन कुमार ही 1984 के दंगों का मास्टमाइंड है।

तारा ने पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर के रास्ते भारत में पांच किलो आरडीएक्स भेजा था। 12 अक्तूबर 2011 को अंबाला कैंट में कार पार्किंग में खड़ी एक इंडिका कार से 5.6 किलो आरडीएक्स बरामद किया गया था और तभी से तारा का नया आतंकी ग्रुप सामने आया था।

तारा ने खुद अपने लेटर हेड पर पत्र लिखकर दावा किया था कि यह आरडीएक्स सज्जन कुमार को मारने के लिए भेजा गया था। दरअसल, आरडीएक्स की यह खेप दिल्ली नहीं पहुंच पाई थी क्योंकि वहां की एजेंसियों को नेपाल से आने वाली कॉल्स में कुछ इनपुट मिले थे कि दिल्ली में ब्लास्ट की योजना है।

इसके बाद दिल्ली को पूरी तरह सील किया गया था। इसके बाद तारा का गुट पाकिस्तान खुफिया एजेंसी आईएसआई का सबसे निकटवर्ती और चहेता बन गया।

पाकिस्तान भी गया, कई आतंकी घटनाओं में शामिल

एजेंसियों की सूचना के मुताबिक तारा पाकिस्तान पहुंचा तो वहां पर बीर्केआई चीफ वधावा सिंह के साथ उसका खासा लगाव रहा। यही कारण था कि उसको वहां वधावा सिंह के बाद डिप्टी बनाया गया था। वर्ष 2005 में दिल्ली में दो स्थानों पर विस्फोट, दो साल बाद लुधियाना में विस्फोट और आरएसएस के रूलदा सिंह की हत्या में तारा की मुख्य भूमिका रही।

इसके अलावा नाभा में बाटलिंग प्लांट के पास विस्फोटक के अलावा हलवारा में एयरफोर्स स्टेशन के पास भी विस्फोटक में तारा व उसके साथियों का हाथ था। तारा के संपर्क जहां जम्मू कश्मीर में फैल गए थे वहीं उसका संपर्क यूके में भी था। यूके की मिडलैंड वेस्ट पुलिस ने चार आतंकियों को काबू किया था।

इसमें गुरशरणबीर सिंह, परमजीत सिंह पम्मा, प्यारा सिंह गिल व अमृतबीर सिंह शामिल थे। इनका भी हाथ रूलदा सिंह हत्याकांड में था और वहीं से खुलासा हुआ था कि तारा ने ही यूरोप के आतंकवादियों की मदद से रूलदा सिंह की हत्या करवाई थी।

काउंटर इंटेलिजेंस की सूचना पर गिरफ्तार हुआ तारा

पिछले साल नवंबर माह में काउंटर इंटेलिजेंस की टीम ने रमनदीप गोल्डी को काबू किया था जो तारा के नेटवर्क का मुख्य आतंकी था। चेन्नई एयरपोर्ट से काबू गोल्डी से ही सुराग मिले थे कि तारा थाईलैंड में छिपा हुआ है और वहीं से पंजाब में आतंकवाद को जिंदा करने की साजिश रची जा रही है।

इसके बाद काउंटर इंटेलिजेंस की टीम ने अपनी सूचना केंद्रीय खुफिया एजेंसी आईबी को दी। आईबी व काउंटर इंटेलिजेंस की टीम ने होमवर्क कर तारा को थाईलैंड में काबू किया। तारा पर पंजाब में कुल 10 केस दर्ज हैं जिसमें उसको पंजाब में भुगतना होगा।

जालंधर पुलिस भी तारा से करेगी पूछताछ

जालंधर की देहात पुलिस भी तारा के भारत पहुंचते सक्रिय हो जाएगी। यहां उसके खिलाफ दो अपराधिक केस दर्ज हैं। दोनों मामले में तारा से पूछताछ की जानी है। एक मामला भोगपुर थाने में का है, जिसके तहत स्थानीय देहात पुलिस ने तीन आतंकवादियों को जंमू से काबू किया था।

एसएसपी नरेंद्र भार्गव ने तारा से पूछताछ करने के लिए लिए जालंधर लाने की तैयारी शुरू किए जाने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया भोगपुर थाने में दर्ज मामले में करणजीत नाम का आतंकी थाईलैंड से होकर आया था, जहां पर उसको ट्रेनिंग दी गई थी। इस मामले में तारा का नाम आया था।

दूसरा मामला 2012 का है, जब देहात पुलिस ने कुलबीर सिंह बड़ा पिंड के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसमें पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुलबीर सिंह बड़ा पिंड के खालिस्तान टाइगर फोर्स के मुखी जगतार सिंह तारा के साथ संबंध हैं और वह पंजाब में विस्फोट की योजना बना रहे हैं। इन दोनों मामले में तारा को पूछताछ के लिए जालंधर लाने की तैयारी चल रही है।

तारा की गिरफ्तारी पर परिवार ने साधी चुप्पी

11 साल पहले बुडेल जेल को सेंध लगाकर भागे पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या में शामिल व बब्बर खालसा के आतंकी जगतार सिंह तारा के गांव डेकवाला में चुप्पी का माहौल है।

गांव के लोग और परिवार का कोई भी सदस्य कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। तारा की भाभी बलजीत कौर ने भी बमुश्किल बात की। तारा के पकड़े जाने की खबर पर गांव डेकवाला के लोगों का कहना है कि अब पुलिस तारा के परिवार को परेशान करेगी।

तारा का काफी सालों से गांव व परिवार के साथ कोई संपर्क नहीं है। तारा के पिता साधु सिंह की मौत बीमारी के कारण हो गई थी। माता महिंदर कौर का सदमे में ही स्वर्गवास हो गया था।  तारा के दो भाइयों का भी स्वर्गवास हो चुका है।
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भाभी बोली, पुलिस परिवार को कर रही परेशान

छह भाइयों में सबसे छोटे जगतार सिंह तारा ने 12वीं तक की शिक्षा गांव पुरखाली के सरकारी स्कूल से प्राप्त की थी। तारा दिल्ली में ड्राइवर था और आतंकी जत्थेबंदी से कब जुड़ा इस बारे में न तो परिवार को कोई जानकारी है और न ही गांव के किसी व्यक्ति को। तारा की भाभी बलजीत कौर ने बताया कि वह वष्र 1989 में शादी कर गांव डेकवाला में आई थी।

उस समय तारा काफी छोटा था। उन्होंने बताया कि तारा ने जेल में रहकर ही ज्ञानी पास की। बलजीत कौर ने बताया कि उसके पति शमशेर सिंह दुबई में रहते हैं और कुछ समय पहले बेटी की शादी करने के लिए गांव आए थे फिर वापस चले गए।

उन्होंने बताया कि पिछले साल अगस्त माह में पुलिस उनके घर पूछताछ के लिए आई थी जब कि इससे पहले काफी समय से उनसे कोई पूछताछ नहीं की गई। उन्होंने कहा कि जब तारा जेल में था तो उसे मिलने के लिए जाते थे पर अब तो उनका उससे कोई संपर्क नहीं है।

बलजीत कौर ने कहा कि तारा के कारण परिवार व रिश्तेदारों को पुलिस के परेशान करने पर रिश्तेदारों ने उनसे मुंह ही मोड़ लिया। उन्होंने बताया कि जगतार सिंह तारा के बड़े भाई को पुलिस 15 अगस्त से एक बार पहले और दो बार बाद में पूछताछ के लिए भी ले गई थी। जबकि तारा के बडे भाई बलविंदर सिंह को उनके पकड़े जाने के बारे में कुछ पता नहीं था और उन्होंने इस बारे में कुछ नहीं कहा।
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