हाईकोर्ट ने आवारा कुत्तों द्वारा काटे जाने के मामले में प्रशासन को प्रशासन को मुआवजा देने का प्रावधान करने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा है कि शहर में आवारा कुत्तों द्वारा काटे जाने के मामलों में प्रशासन द्वारा करवाया जाने वाला मुफ्त इलाज ही काफी नहीं है। प्रशासन को ऐसे मामलों में मुजावजा देने का भी प्रावधान करना चाहिए। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम को इस मामले में गुरुवार को जवाब देने के आदेश दिए हैं।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस राजन गुप्ता ने कहा की अभी तक प्रशासन ने इस मामले में मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं बनाया है। जबकि ऐसा किया जाना जरुरी है। पिछली सुनवाई के दौरान नगर निगम ने हाईकोर्ट को बताया था कि प्रशासन की ओर से कुत्ता काटने के केस में मुफ्त इलाज किया जाता है, लेकिन मुआवजा दिए जाने को लेकर कोई नीति नहीं बनाई गई है।
हाईकोर्ट ने शहर में अलग से डाग शेल्टर बनाए जाने को लेकर जवाब मांगा है। चंडीगढ़ नगर निगम के ज्वाइंट कमिश्नर राजीव कुमार गुप्ता ने हाईकोर्ट में जवाब दायर कर कहा था कि पंजाब म्युनिसिपल एक्ट के प्रावधानों के मुताबिक शहर में पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। हमने कुत्तो का रजिस्ट्रेशन न करवाने वालों के 266 ऐसे चालान भी किए हैं। इस मामले में अब गुरुवार को चंडीगढ़ नगर निगम अपना जवाब देगा।