बरवाला के बहुचर्चित बतौड़ कांड के सभी 15 आरोपियों को सबूतों के अभाव में कोर्ट से बरी कर दिया गया।
शामलात जमीन मुद्दे पर सवर्ण व दलितों के बीच मार्च 2011 में टकराव हुआ था, जिसके बाद कई दिनों तक धरना-प्रदर्शन हुआ था।
एडवोकेट एसपीएस परमार व अभिषेक सिंह राणा के मुताबिक, सबूतों के अभाव में आरोपी बरी हुए। यह मसला एक राजनैतिक पार्टी की हवा से उठा था। जिस व्यक्ति ने शिकायत की थी, वह दलित नहीं, बल्कि बैकवर्ड क्लास से था।
दरअसल, बतौड़ गांव की शामलात जमीन से उस वक्त करीब 15 लाख रुपये की आमदनी होती थी। इस आमदनी के हिस्से के लिए ही सवर्ण व दलितों के बीच टकराव हुआ था।
17 मार्च 2011 को विवाद होने के बाद चंडीमंदिर थाने में सवर्ण जाति के कई लोगों के खिलाफ मारपीट, धमकी, कब्जा व एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ।
फिर कई दिनों तक गिरफ्तारी नहीं होने के चलते दलित समाज ने धरने-प्रदर्शन किए। बाद में पुलिस ने जितेंद्र, राजबीर, रविंद्र, विजय पाल, जितेंद्र, उपदेश, करनबीर, लज्जा राम, सतीश, भीम सिंह, जसवीर, रण सिंह, गोलू, सोनू व मनदीप को गिरफ्तार कर आरोपी बनाया था। अब सभी को कोर्ट से बरी कर दिया गया।