अमृतसर में श्री दरबार साहिब के गलियारे के आसपास अवैध तौर पर बने होटलों को हटाए जाने के मामले में प्रशासन की ढिलाई को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गंभीरता लेते हुए जिले के चार शीर्ष अधिकारियों को कोर्ट में तलब कर लिया है।
सोमवार को इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस महेश ग्रोवर ने अमृतसर के डीसी रवि भगत, एसडीएम संदीप ऋषि, निगम आयुक्त प्रदीप सबरवाल और सीनियर टाउन प्लानर हेमंत बतरा को आगामी 2 मार्च को अदालत में पेश होने के आदेश जारी कर दिए।
एडवोकेट सरबजीत सिंह वेरका द्वारा दायर याचिका में अदालत को जानकारी दी गई कि श्री दरबार साहिब के गलियारे के आसपास अवैध कब्जे हटाने के लिए प्रशासन ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की।
इसके जवाब में प्रतिवादी द्वारा दाखिल जवाब पर असंतोष जताते हुए जस्टिस महेश ग्रोवर ने कहा कि प्रतिवादी गलियारे के आसपास कब्जाधारी होटलों व दुकानदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सके हैं।
उनकी कार्रवाई केवल मुंहजुबानी है और प्रत्यक्ष में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अदालत में मामले की अगली सुनवाई 2 मार्च तय करते हुए उक्त चारों वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत तौर पर अदालत में उपस्थित रहने के आदेश जारी किए हैं।
यह है मामला
एडवोकेट सरबजीत सिंह वेरका ने श्री दरबार साहिब के आसपास अवैध होटलों को लेकर वर्ष 2010 में एक जनहित याचिका दायर की थी। इसके जवाब में तत्कालीन डीसी ने हलफनामा दाखिल कर क्षेत्र में 21 अवैध होटल होने की बात स्वीकारी जबकि नगर निगम ने आरटीआई के तहत दी गई सूचना में शहर के भीतर 105 ऐसी इमारतों की जानकारी दी।
वेरका ने यही सूची हाईकोर्ट में दाखिल कर दी, जिसके बाद कोर्ट ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई का आदेश दिया था। बाद में होटलों की सूची 125 तक पहुंच गई थी।