गर्लफ्रेंड को डराने के लिए फायरिंग करने वाले शख्स को 30 साल बाद दबोच लिया गया है। तीस साल पुरानी ये कहानी काफी दिलचस्प है। सीआईए फतेहाबाद ने 30 सालों से फायरिंग के एक केस में फरार चल रहे एक भगोड़े को काबू किया है। आरोपी की पहचान 82 वर्षीय पंजाब के मोगा निवासी दरबारा सिंह के रूप में हुई है जो 1987 में कोर्ट से जमानत लेने के बाद से फरार चल रहा था।
दरअसल दरबारा सिंह के भगोड़ा बनने की कहानी बहुत दिलचस्प है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार साल 1981 में पंजाब के मोगा निवासी दरबारा सिंह की एक महिला मित्र थी, जिसके साथ उसका अफेयर बताया गया था। लेकिन किसी कारणों के चलते वो महिला मित्र दरबारा को छोड़कर चली गई।
मूलत: मोगा का रहने वाला दरबारा सिंह उसके पीछे उस महिला मित्र के गांव तक पहुंच गया और जब उसे इस बात की जानकारी हुई कि उसकी महिला मित्र अब नहीं उसके पास नहीं आएगी तो उसने गुस्से में आकर अपनी लाइसेंसी बंदूक से हवाई फायर कर दिए। उस वक्त दरबारा की उम्र तकरीबन 45 साल के करीब थी।
30 सालों से धक्के खा रही थी पुलिस
30 साल बाद गिरफ्तार
फायरिंग की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची थी और उसको गिरफ्तार कर हिसार अदालत में पेश किया गया जहां से उसे जमानत मिल गई, लेकिन जमानत मिलने के बाद से दरबारा सिंह फरार हो गया। तारीखों पर न आने पर कोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया। इसके बाद से पुलिस पछिले तीस सालों से दरबारा सिंह की तलाश में धक्के खा रही थी।
दो-तीन दिन पहले सीआईए इंचार्ज हरबंस लाल को दरबारा सिंह की सही लोकेशन की सूचना मिली। जिसके बाद उन्होंने एक टीम को पंजाब के मोगा में रेड डालने भेजा। सीआईए टीम ने दरबारा की लोकेशन के आधार पर उसे उसके घर से ही काबू कर लिया और सीआईए स्टेशन फतेहाबाद में ले आई। कभी 45 साल की उम्र में फायरिंग कर फरार होने वाला दरबारा अब 82 साल का बुजुर्ग हो गया, जिससे ढंग से चला भी नहीं जाता।
फायरिंग के एक मामले में पिछले तीस सालों से फरार चल रहे दरबारा सिंह को काबू करने में कामयाबी हासिल हुई है। इसे पंजाब से गिरफ्तार किया गया है और शनिवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा।
हरबंस लाल, सीआईए प्रभारी, फतेहाबाद।