अरोमा होटल के पास आयरलैंड से एमबीए करके लौटे
हरमिंदर सिंह की गैर इरादतन हत्या के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र
न्यायाधीश केके करीर की अदालत ने आठ युवकों को दोषी करार दिया है।
जज का
आदेश सुनते ही एक आरोपी एनआरआई सुखजीत सिंह कोर्ट रूम से भाग गया।
नायबकोर्ट और कोर्ट स्टाफ ने तुरंत सूचना सेक्टर-43 पुलिस को दी। पुलिस ने
मोहाली, चंडीगढ़ पुलिस और दिल्ली एयरपोर्ट पर आरोपी के बारे में अलर्ट
किया। बाद में देर रात उसने सेक्टर-36 थाने में सरेंडर कर दिया।
सुखजीत ने
बताया कि वह घबरा गया था और आत्महत्या के इरादे से भ्ाागा था। मगर बाद में
लौट कर सरेंडर कर दिया। हत्या में दोषी ठहराए गए युवकों में मोहाली के
फेस-11 निवासी सुखजीत सिंह, सेक्टर-44 निवासी हरसिमरन जीत, बुडै़ल निवासी
चंदन, संदीप व गौतम, सेक्टर-41 निवासी आनंद, महावीर और सेक्टर-49 निवासी
प्रशांत कुमार शामिल हैं।
यह है मामला
सेक्टर-55 निवासी हरिमंदर 13 जनवरी 2013 की रात दोस्त राजन की पत्नी के बेटी होने की बधाई देने मोहाली के अस्पताल गया था। रात करीब 11.30 बजे हरिमंदर अकेले ही कॉफी पीने होटल अरोमा पहुंच गए। उसने आइसक्रीम ली और बाहर निकलते समय हरसिमरनजीत सिंह से टक्कर हो गई थी। इसके चलते आइसक्रीम नीचे गिर गई।
आरोपियों ने हरिमंदर के थप्पड़ जड़ दिए और वहां से चल दिए। हरसिमरन दोस्त एनआरआई सुखजीत सिंह, चंदन, संदीप, गौतम, आनंद, महावीर और प्रशांत कुमार पेट्रोलपंप के पीछे खड़ी गाड़ी में बैठने लगे। इतने में हरिमंदर उनके पास पहुंचा। यहां आरोपियों ने उसे सड़क पर गिराकर जमकर पीटा।
डंडे से उसके सिर पर वार किए। सिक्योरिटी गार्ड दिलशाद अली ने पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस ने घायल अवस्था में उसे अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां डॉक्टरों ने उसे मृृत घोषित कर दिया था। पुलिस ने सिक्योरिटी गार्ड की शिकायत पर सभी युवकों के खिलाफ हत्या का मामला दर्जकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।
इन धाराओं के तहत होगी सजाधारा 304: दस साल से लेकर उम्रकैद तक सजा और जुर्मानाधारा 147: दो साल और जुर्मानाधारा 148: तीन साल और जुर्मानाधारा 149: तीन साल और जुर्माना
पुलिस का खेल अरोमा
मर्डर केस में पुलिस ने पहले कत्ल की धारा-302 के तहत सात आरोपियों के
खिलाफ केस दर्ज किया था। चालान पेश करते वक्त पुलिस ने कत्ल का केस बदलकर
गैर इरादतन हत्या की धारा-304 लगा दी। आरोपियों को पकड़ने के लिए सीसीटीवी
फुटेज से शिनाख्त हुई और स्कॉर्पियो कार से अहम सबूत मिले। लेकिन चालान में
सीसीटीवी फुटेज का जिक्र तक नहीं किया गया। सुखजीत सिंह ने ही चालान से
सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीद छिपाने को लेकर देशराज सिंह और एसआई राजीव के
खिलाफ आईपीसी की धारा 201 के तहत केस दर्ज करने की मांग कर रखी है।
दोस्त का बयान रहा अहम मामले
की गवाही के दौरान दिलशाद अली ने आरोपियों को पहचानने और मारपीट होने से
इंकार किया था, लेकिन मृतक का दोस्त व चश्मदीद रूहबीर सिंह आस्ट्रेलिया से
गवाही देने के लिए अदालत में पहुंचा था। रूहबीर सिंह ने कहा कि वारदात के
वक्त वह होटल अरोमा में था। उसके सामने ही हरिमंदर की मारपीट हुई।
आरोपी
युवकों ने शराब पी रखी थी। कुछ इंडेवर में बैठे, जिसके बाद इंडेवर कार
रिवर्स हुई। उससे हरिमंदर को हिट किया गया और कार उसे कुचल कर भाग गई।
रूहबीर ने तुरंत पीसीआर को फोन किया। पीसीआर कर्मियों ने ही हरिमंदर को
उठाकर जिप्सी में डाला। एसएचओ-17 और चौकी इंचार्ज 22 ने कई बार फोन पर बात
की।