चंडीगढ़ सेक्टर-37 में पंजाब भाजपा के कार्यालय पर ग्रेनेड हमले के मामले में पुलिस को कई अहम सुराग मिले हैं। ग्रेनेड हमले का आरोपी गुरतेज सिंह चंडीगढ़ में तीन साल से बाइक राइडर का काम कर रहा था और तब से घर भी नहीं गया। वहीं अमनप्रीत चंडीगढ़ में गाड़ी चला रहा था।
मोरिंडा के गांव रतनगढ़ में छापे के दौरान ग्रेनेड फेंकने के आरोपी अमनप्रीत सिंह के घर से चंडीगढ़ पुलिस को पीले रंग का संदिग्ध लिफाफा मिला है। वह उसे साथ लाई है। आशंका है कि इसमें हमले से जुड़ी कोई अहम जानकारी या सामग्री हो सकती है। हालांकि अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। चंडीगढ़ हमले को जांच एजेंसियां अमृतसर धमाके से जोड़कर देख रही हैं।
सीसीटीवी फुटेज और घटना के वीडियो की जांच में खुलासा हुआ है कि ग्रेनेड अमनप्रीत ने फेंका जबकि गुरतेज वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहा था। यही पैटर्न 29 मार्च को अमृतसर में पुलिस थाने के बाहर हुए बम धमाके में भी देखा गया था। इसी आधार पर जांच एजेंसियां दोनों घटनाओं के बीच कड़ी तलाश रही हैं। इस मामले की जांच चंडीगढ़ पुलिस के साथ-साथ एनआईए, पंजाब काउंटर इंटेलिजेंस और एजीटीएफ जैसी एजेंसियां भी कर रही हैं। गुरतेज की मां ने बताया कि वह 3 साल से घर नहीं आया।
चंडीगढ़ में हमले के बाद पुलिस घर आई थी और पूछताछ की। मां ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली थी कि गुरतेज चंडीगढ़ में बाइक राइडर का काम करता है। जिस एक्टिवा का वह इस्तेमाल करता था, वह उसकी खुद की थी या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है।