दो सहेलियों ने मिलकर प्लॉट लिया। आधे-आधे पैसे लगाए, लेकिन रजिस्ट्री सिर्फ एक के नाम हो गई। विवाद हुआ तो उसे निपटाने के लिए एक एग्रीमेंट बना लिया, जिसमें तय हुआ कि जब प्लॉट बेचा जाएगा तो दोनों का बराबर हक होगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
एक सहेली ने 11 लाख रुपये में प्लाट बेच दिया और सारे पैसे खुद ही रख लिए। मामला पुलिस तक पहुंचा और जांच के बाद धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया।
पुलिस के मुताबिक, पिंजौर की धर्मपुर कालोनी में ऊषा मारवाड़ी अपने परिवार के साथ रहती हैं और पिंजौर की हिमशिखा कालोनी में रहने वाली रितु शर्मा से पारिवारिक रिश्ते हैं।
दोनों ने मिलकर पिछले वर्ष पिंजौर में एक प्लॉट खरीदा, जिसमें दोनों के आधे-आधे पैसे लगे। लेकिन रजिस्ट्री के वक्त रितु ने सिर्फ अपने नाम प्लाट करा लिया।
जब इस बात का पता चलते ही ऊषा को लगा तो उसने विरोध किया। काफी बीच बचाव के बाद एक समझौता साइन हुआ कि प्लॉट बेचने के वक्त आधे पैसे देंगे, लेकिन रितु ने ऐसा नहीं किया और न ही पैसे लौटाए।
ऊषा ने डीसीपी ऑफिस में शिकायत दी और ईओडब्ल्यू द्वारा जांच के बाद रितु के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 के तहत मामला दर्ज किया गया।
इधर, आस्ट्रेलिया और कनाडा के सपने दिखाकर ठगे आठ लाख
सेक्टर-10 निवासी एक व्यक्ति धोखाधड़ी का शिकार बन गया। आरोप है कि उसे आस्ट्रेलिया और कनाडा भेजने के सपने दिखाकर दो भाईयों ने आठ लाख रुपये ठग लिए।
शिकायत के बाद सेक्टर-5 थाना पुलिस ने सेक्टर-15 निवासी दो भाइयों के खिलाफ आईपीसी की धारा 406, 420 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
सेक्टर-10 निवासी सतपाल सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह विदेश जाने का इच्छुक था। किसी तरह वह सुनील कुमार के संपर्क में आया और उसने अपने भाई अनिल से मुलाकात कराई।
सतपाल के मुताबिक उसने एडवांस में आठ लाख रुपये दे दिए, जबकि बात 15 लाख में तय हुई थी। ये पैसे पिछले साल दिए गए थे, लेकिन न तो उसे विदेश भेजा पाया और न ही पैसे लौटाए गए।
पुलिस ने अनिल और सुनील के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।