बैंक से करोड़ों के गबन मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने एन नागेश्वर राव, एस रामाचंद्रन, संदीप शर्मा, विक्रम शर्मा और गीता राम ठाकुर को तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई है।
वहीं गीता राम ठाकुर पर 45 हजार, एन नागेश्वर राव, एस रामाचंद्रन पर 35-35 हजार और संदीप शर्मा व विक्रम शर्मा पर 25-25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। वहीं, इससे पहले विशेष अदालत इसी मामले में चार आरोपियों नरेश, सुरेश, मोहिंद्र और रणधीर सिंह को सबूतों के अभाव में बरी कर चुकी है।
दोषियों के खिलाफ सीबीआई अदालत ने धोखाधड़ी, जालसाजी जैसी धाराओं में संदीप शर्मा समेत अन्य के खिलाफ दिसंबर 2009 में आरोप तय किए थे। वहीं, संदीप शर्मा के वकील अनिल कुमार कौशिक के अनुसार वह सीबीआई अदालत के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
जून 2008 के चर्चित शुभम अस्पताल फर्जीवाडे़ से संदीप शर्मा चर्चा में आया था। संदीप शर्मा ने बिशनपुरा को-ऑपरेटिव बिल्डिंग सोसायटी लिमिटेड जीरकपुर में 12 फ्लैट्स गिरवी रखकर कोऑपरेटिव बैंक से 2.65 करोड़ रुपये का लोन लिया था।
सीबीआई केस के अनुसार यह लोन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लिया गया था। जांच में पता चला कि संदीप शर्मा इन फ्लैट्स का मालिक नहीं था। लोन अदा न करने पर बैंक ने संदीप के खिलाफ शिकायत दी थी। सीबीआई ने जांच के दौरान संबंधित बैंक के कुछ कर्मियों को भी आरोपी बनाया था।