पश्चिम दिल्ली पुलिस ने फर्जीवाड़े के कई मामलों में भगोड़ा करार एक आरोपी को कीर्ति नगर के मानसरोवर गार्डन इलाके से मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया है। वह पत्नी की हत्या करने के मकसद से आया था। उसके पास से एक पिस्टल और कारतूस मिले हैं। उसके खिलाफ डॉक्टर पत्नी व उसके परिजनों ने धोखाधड़ी और ससुर पर छेड़छाड़ की शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस पकड़ने गई तो आरोपी ने गोली चलाने की कोशिश की, लेकिन गोली पिस्टल में फंस गई।
जिला पुलिस उपायुक्त विजय कुमार ने बताया कि आरोपी डीएलएफ कैपिटल ग्रीन जीरकपुर पंचकूला निवासी मनीष उर्फ वरुण कौल उर्फ डॉक्टर विशेष धीमान उर्फ डॉक्टर संजीव चड्ढा है। गत मार्च माह में निमड़ी कॉलोनी निवासी महिला डॉक्टर ने मोती नगर थाने में पति मनीष के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में डॉक्टर ने कहा था कि जीवनसाथी डॉट कॉम साइट के जरिये उसकी मुलाकात मनीष कौल से हुई थी। उसने खुद को एमबीबीएस डॉक्टर बताया। वर्ष 2017 में दोनों ने शादी कर ली।
शादी में करीब 20 लाख कीमत के जेवर दिए गए। कुल 50 लाख रुपये खर्च हुए थे। कुछ दिन बाद ही ससुरालवालों दहेज की मांग शुरू कर दी। डॉक्टर ने ससुर डॉक्टर राजेंद्र कौल पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया। शिकायत में उसने कहा कि बाद में पता चला कि पति का असली नाम वरुण कौल है और वह डॉक्टर नहीं है। उस पर दिल्ली, चंडीगढ़, गोवा और महाराष्ट्र में फर्जीवाड़े के कई मामले दर्ज हैं। उसे पता चला कि आरोपी के पिता का यह दावा भी गलत है कि वह इंडियन एयरफोर्स में काम करता था।
उसने बताया कि मनीष पर एचडीएफसी बैंक से 40 लाख की धोखाधड़ी का मामला भी दर्ज है। पुलिस टीम ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पंचकूला में दबिश दी। परिवार के दो सदस्य गिरफ्तार कर लिए गए, जबकि मनीष समेत दो आरोपी फरार हो गए। 18 मई को पुलिस को सूचना मिली कि मनीष पत्नी की हत्या के मकसद से मानसरोवर गार्डन स्थित क्लीनिक पर आया है। यह क्लीनिक उसकी पत्नी एक अन्य महिला डॉक्टर के साथ चलाती है।
पुलिस टीम क्लीनिक पर पहुंची तो दूसरी डॉक्टर ने बताया कि मनीष क्लीनिक में आकर पत्नी की तलाश कर रहा था और पिस्टल दिखाकर धमकी देकर गया है। पुलिस टीम बाहर उसकी तलाश में गई और उसे घेर लिया। पुलिस ने मनीष से समर्पण के लिए कहा, लेकिन उसने पिस्टल से गोली चलाने की कोशिश की। गोली नहीं चली और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से पिस्टल और दो कारतूस मिले।
नकली डीडी से खरीद चुका है लग्जरी गाड़ियां
जांच में पता चला कि मनीष के पास बीएएमएस की डिग्री है, लेकिन वह खुद को एमबीबीएस बताता था। वह दिल्ली, चंडीगढ़ और पंजाब के कई कार डीलरों को नकली डिमांड ड्राफ्ट देकर लग्जरी गाड़ियां खरीद चुका है। सितंबर 2008 में मुंबई पुलिस ने फर्जीवाड़े में मनीष और उसके पिता को गिरफ्तार किया था। दोनों आरोपी नकली डिमांड ड्राफ्ट देकर हौजखास और रोहिणी के ज्वेलरों से लाखों की ठगी कर चुके हैं। जेल से निकलने के बाद दोनों फिर कार डीलरों से ठगी करने लगे। उन्होंने पटेल नगर के फर्जी पते पर दो सिम खरीदे और उनसे कार डीलरों के साथ ठगी की। पुलिस ने बताया कि आरोपी पर हौजखास, चंडीगढ़, गोवा में फर्जीवाड़े के मामले दर्ज है। चेक बाउंस के कई मामले में वह भगोड़ा करार है।