नकली चोट, असली केस मामले में सिविल अस्पताल के तत्कालीन मेडिकल ऑफिसर और राजस्थान के चूरू जिले के गांव डूमकी निवासी दस-दस साल की कैद की सजा सुनाई। एडीजे अलका मलिक की अदालत ने और दोनों पर 1.10-1.10 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया। साथ ही बालसमंद निवासी डॉ. भूप सिंह खत्री और जयबीर को जुर्माने के 2 लाख रुपये शिकायतकर्ता को मुआवजे के तौर पर देने को भी कहा।
जुर्माना न भरने पर दोनों को दो-दो साल की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। राजस्थान के जिला चूरू के गांव धानोठी के एडवोकेट हरदीप सिंह ने छह साल पहले 23 मार्च 2010 को स्टिंग ऑपरेशन कर नकली चोट, असली केस प्रकरण का खुलासा किया था। एडवोकेट हरदीप सिंह ने फैसला आने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि यह न्याय और सच्चाई की जीत है।
कोर्ट परिसर में जान से मारने की धमकी मिलने के बाद मैंने सोचा था कि केस हिसार से कहीं और ट्रांसफर कराने का प्रयास करूं। फिर सोचा था कि नकली चोट का मामला यहां उजागर हुआ है तो फैसला यहीं होना चाहिए। ऐसे लोगों की हकीकत जनता के सामने आ सके। आरोपी पक्ष ने मुझे हर तरीके से मनाने का प्रयास किया।
ऐसे उजागर हुआ मामला
गुरेरा गांव व सिवानी के बीच काले तेल की एक बंद फैक्ट्री में एडवोकेट हरदीप सिंह का भाई पवन कुमार सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर तैनात था। वहां 15 दिसंबर 2009 को डूमकी का जयबीर और चार अन्य लोग जीप में आए थे। उन्होंने वहां पवन के साथ हाथापाई की थी। इसकी शिकायत सिवानी थाना में की गई थी। सिवानी पुलिस ने उलटा पवन पर ही हत्या प्रयास का केस दर्ज कर लिया।
हरदीप को पता चला था कि विवाद में कहीं पर भी जयबीर के सिर पर चोट नहीं लगी थी। हिसार सिविल अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. भूपसिंह खत्री ने पैसे लेकर खुद जयबीर के सिर पर चोट मारी। इसके बाद मेडिकल रिकॉर्ड बनाते हुए पवन, हरदीप सहित अन्य के खिलाफ हत्या प्रयास का केस दर्ज किया गया था।
ऐसे पहुंचे जड़ तक
एडवोकेट हरदीप पर हत्या प्रयास का केस दर्ज होने के बाद उन्होंने इसकी जड़ तक पहुंचने का प्रयास किया। तब उनको पता चला था कि हिसार के कुछ अस्पतालों में डॉक्टर मोटे रुपये लेकर नकली चोट मारने का गोरखधंधा करते हैं। नकली चोट के जरिए आरोपी अपने सामने वालों को फंसाते हैं।
इसके बाद केस का पर्दाफाश करने के लिए बहाना बनाकर हिसार के एक प्राइवेट अस्पताल के कर्मचारी से संपर्क किया था। जिसमें नकली चोट मारने के लिए डे़ढ लाख रुपये में सौदा तय हुआ था। पुलिस से संपर्क कर हरदीप ने इस मामले में दो निजी अस्पतालों के कर्मचारियों को 50 हजार रुपये लेते रंगे हाथ पकड़वाया। वकील एडवोकेट ने इस पूरे प्रकरण की सीडी बना ली थी।
नए सिरे से हुई जांच, फर्जी केस को किया खारिज
इस प्रकरण का खुलासा होने के बाद पुलिस ने नए सिरे से जांच करते हुए एडवोकेट हरदीप, उसके भाई पवन व अन्य पर बनाए गए फर्जी केस को खारिज कर दिया। पुलिस ने एडवोकेट हरदीप की शिकायत पर जयवीर पर धोखाधड़ी, झूठा केस बनवाने सहित अन्य धाराओं पर केस दर्ज किया। जयवीर को पुलिस ने गिरफ्तार कर पूछताछ की। जिस पर जयवीर ने बताया कि उसने सामान्य अस्पताल के एमओ डॉ. भूप सिंह खत्री को 1.50 लाख रुपये देकर नकली चोट मरवाई थी।
जयवीर ने बताया कि डॉ. भूप सिंह ने इमरजेंसी के सामने वाले कक्ष में पहले उसे एनिस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया। इसके बाद मेडिकल उपकरण से सिर पर कनपटी के हिस्से में चोट मारी। फिर इसे गंभीर चोट बताकर एमएलआर काटी। जयवीर को पीजीआई रोहतक के लिए रेफर कर दिया था। जयवीर के बयान दर्ज होने के बाद पुलिस ने भूप सिंह पर केस दर्ज किया था।