कुंभड़ा केस में अपने ही दोस्त को मौत के घाट उतारने वाला आरोपी मनीष कुछ महीनों से जमानत पर चल रहा था। वह पहले भी कई बार वीर सिंह को धमकियां दे चुका था। आरोपी शुक्रवार सुबह साढ़े छह बजे अपने साथी के साथ गांव कुंभड़ा की कुम्हार कालोनी स्थित वीर सिंह के घर पहुंचे। वे पहले भी वहां एक-दो बार उनके घर आए थे। ऐेसे में वीर सिंह से उनकी जान-पहचान होने के कारण वे बातचीत करने लगे।
वीर सिंह की पत्नी ने पहले पानी और फिर चाय पिलाई। इसके बाद जाते हुए मनीष ने वीर सिंह को धक्का देकर गिरा दिया। फिर उठाते हुए देसी कट़्टे से फायरिंग कर दी तो वीर सिंह लहूलुहान होकर गिर गया। लेकिन उसने फिर भी उनसे मुकाबला करने की कोशिश की। आरोपी वहां से निकल गए तो वीर सिंह उनका पीछा करते हुए घर के बाहर तक पहुंच गया।
इस दौरान गोली की आवाज सुनकर परिवार वाले व आस पड़ोस के लोग इकट्ठा हो गए। घरवाले तुरंत वीर सिंह को फोर्टिस अस्पताल ले गए। जहां पर उनका इलाज चल रहा है हालांकि उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। दूसरी तरफ परिवार वाले वारदात के बाद सहमे हुए हैं। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा है कि आखिर किस पर विश्वास करे या नहीं। सारी वारदात कैमरे में कैद हो गई है। हालांकि यह किसी को पता नहीं था कि आरोपी किस वाहन पर आए थे।
फोर्टिस अस्पताल के बाहर घायल वीर सिंह के बेटे कमल ने बताया कि उनके पास इस समय इलाज के लिए पैसे नहीं हैं। वह समझ नहीं पा रहे हैं कि अपने पिता का इलाज कैसे करवाएंगे। उन्होंने पिता के इलाज के लिए एक ब्लैंक चेक अस्पताल वालों को दिया है। उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनकी आर्थिक मदद की जाए ताकि वह अपने पिता का इलाज अच्छे तरीके से कर पाएं।
ऐसे बने थे हत्या केस में वीर सिंह गवाह
जानकारी के मुताबिक यह मामला अक्तूबर 2015 में सामने आया था। जब एनआरआई मनीष प्रभाकर हाल निवासी बरनाला अपने चार साथियों सहित कुंभड़ा चौक से कार में गुजर रहा था। जब वह कुंभड़ा चौक से गुजरे तो मनीष प्रभाकर ने हरप्रीत पर गोली चला दी थी।
इस दौरान जिस जगह पर वह गिरा था, उसके पास ही वीर सिंह गमलों व अन्य चीजों का काम करते थे। ऐसे में उन्होंने आंखों देखा हाल सुना दिया था। पुलिस ने इस केस में एक महिला और वीर सिंह को गवाह बनाया था। वीर सिंह ने अपने पहले बयान दर्ज करवा दिए थे।
वीर सिंह ने भुगती सच बोलने की सजा
कुंभड़ा चौक पर मारे गए हरप्रीत सिंह के पिता अवतार सिंह ने बताया कि वीर सिंह ने बिल्कुल सही बयान दिए थे। उन्होंने कहा था कि मनीष प्रभाकर ने उनके बेटे को मारा है। इसकी सजा आज वीर सिंह ने भुगती है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पता नहीं कि मनीष प्रभाकर उनके बेटे का दोस्त कैसे बना था।