नाभा में एक दुकानदार ने अपनी बेटी के साथ दुकान की ऊपरी मंजिल में फंदा लगाकर जान दे दी। पुलिस के मुताबिक परिवार वालों ने बयान दिया है कि दुकानदार पिछले कुछ समय से मानसिक तौर पर परेशान रहता था। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर मामले में जांच शुरू कर दी थी। खबर लिखे जाने तक मामले में धारा 174 के तहत कार्रवाई की गई थी।
मामले के जांच अधिकारी नाभा थाने के एएसआई मेवा सिंह ने बताया कि नाभा के दशमेश नगर का रहने वाला 42 साल का जगतार सिंह पुत्र जोगिंदर सिंह की गांव अलौहरां वाली सड़क के पास श्मशानघाट के नजदीक बिजली के सामान की दुकान थी। पत्नी हरजिंदर कौर के मुताबिक सोमवार सुबह उसका पति बेटी सिमरनजीत कौर (19), जो केंद्रीय विद्यालय कैंट रोड में बारहवीं क्लास की छात्रा थी, उसे ट्यूशन से लेकर आया।
करीब पौने आठ बजे जगतार सिंह अपनी बेटी को रोजाना की तरह स्कूल छोडने जाते समय दुकान की चाबी भी यह कहकर ले गया कि वह स्कूल से सीधे दुकान चला जाएगा। कहा कि दुकान पर कोई ग्राहक खड़ा है। जब काफी देर तक जगतार सिंह घर वापस न आया, तो 10 साल के बेटे कर्णवीर सिंह ने पिता के मोबाइल पर फोन किया, लेकिन उसने उठाया नहीं।
जब परिवार वाले दुकान पर पहुंचे, तो देखा कि दुकान का शटर आधा खुला था और अंदर से शीशे का दरवाजा बंद था। आसपास के लोगों की मदद से इस दरवाजे को काट कर जब वह लोग दुकान की पहली मंजिल पर पहुंचे, तो वहां का दृश्य देकर सभी के होश उड़ गए। वहां जगतार सिंह व उसकी बेटी सिमरनजीत कौर पंखे से लटक रहे थें।
पुलिस के मुताबिक पहले बेटी ने फंदा लगाया और फिर दूसरे पंखे के साथ जगतार सिंह ने खुद फंदा लगाया। क्योंकि दुकान की पहली मंजिल पर एक ही मेज था, जिसे आत्महत्या में इस्तेमाल किया गया था। जो जगतार सिंह की लाश के नीचे पड़ा था। पुलिस के मुताबिक परिवार वालों का कहना है कि जगतार सिंह पिछले कुछ समय से मानसिक परेशान था। परेशानी के कारणों का परिवार वालों ने कोई खुलासा नहीं किया है और न ही किसी पर शक जताया। इसलिए पुलिस ने मामले में धारा 174 की कार्रवाई कर दी है।