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3 लाख लेकर फर्जी डिग्री देता था BSc आईटी पास, गिरफ्तार

Sun, 21 Jun 2015 12:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
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3 लाख लेकर बदले में युवाओं को मैनेजमेंट कोर्स की फर्जी डिग्री देता था। अचानक पुलिस के हत्थे चढ़ गया और गिरोह का पर्दाफाश हुआ। पुलिस ने गिरोह के मुख्य आरोपी शिखर वर्मा को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।
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आरोपी चंडीगढ़ के सेक्टर-12 का रहने वाला है। वहीं, उसने बीएसीसी आईटी कर रखी है। आरोपी पूरी प्लानिंग से यह कारोबार चला रहा था। पुलिस ने उसके इंस्टीट्यूट से रिकॉर्ड भी कब्जे में लिया है।

वहीं, शनिवार को आरोपी को अदालत में पेश किया। अदालत ने आरोपी को दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

अखबार में देता था फर्जी इंस्टीट्यूट का विज्ञापन

जानकारी के मुताबिक, पुलिस को आरोपी के खिलाफ करण दत्ता निवासी मनसा देवी कांप्लेक्स ने शिकायत दी थी। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया था कि होटल मैनेजमेंट की डिग्री करने का फैसला लिया था। इसी बीच उन्होंने अखबार में आरोपी के फेज-दो में चलने वाले इंस्टीट्यूट इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ डिस्टेंस एजूकेशन का विज्ञापन देखा।

इसमें उन्होंने होटल मैनेजेंट की डिग्री करवाने का भी दावा किया था। इसके बाद वह उनके इंस्टीट्यूट पहुंचे। इस दौरान उन्होंने इंस्टीट्यूट वालों को अपने बारे में सारी जानकारी दे दी। इस पर इंस्टीट्यूट वालों ने कहा कि वह उन्हें सीधी डिग्री दिलवा देंगे।

उन्हें किसी भी प्रकार की परीक्षा में भी अपीयर नहीं होना पड़ेगा। इसके लिए उन्हें पौने तीन लाख रुपये भरने होंगे। उन्होंने बताया कि उन्होंने संस्थान को पूरी पेमेंट कर दी। इसके बाद संस्थान की तरफ से उन्हें डिग्री दे दी। वह खुशी होकर अपने घर चले गए।
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खुद ही प्रिंट करके देता था फर्जी डिग्री

एक दिन उन्होंने अपने जानकारों को डिग्री दिखाई तो पता चला कि यह तो फर्जी है। जब उन्होंने दोबारा इंस्टीट्यूट में पहुंचे तो उसने उनकी सुनवाई नहीं की। साथ ही कहा कि वह कुछ भी करना चाहता है, जाकर कर ले। इसके बाद उन्होंने दिसंबर -2014 में एसएसपी को शिकायत दी थी।

एसएसपी ने मामले की जांच करवाने के बाद डीए लीगल की राय लेकर आरोपी के खिलाफ पर्चा दर्ज किया है। जिक्रयोग है कि इससे पहले भी पुलिस ने एसएसपी आफिस के पास इसी तरह फर्जी डिग्रियां देकर लोगों को चूना लगवाने वाले गिरोह को काबू किया था।

गिरोह के मेंबर भी एक इंस्टीट्यूट ही चला रहे थे। उनके पास काफी फर्जी डिग्रियां निकली थीं। जांच में पता चला था कि उक्त लोग खुद ही प्रिंटर से विभिन्न यूनिवर्सिटी की डिग्री छापकर लोगों को देते थे।
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