जीएमसीएच-32 में 35 लाख रुपये गबन करने के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रीति साहनी की अदालत ने वीरवार को सबूतों के अभाव में पूर्व चीफ इंजीनियर केके जैरथ समेत आठ को बरी कर दिया।
बरी होने वालों में सुपरिंटेंडिंग जगदीश मित्तर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर साधू सिंह, बोधराज, एसडीओ ओपी अरोड़ा, एके गुप्ता, परमजीत करवल, सुभाष अग्रवाल और ठेकेदार यशपाल सग्गी शामिल हैं।
विजिलेंस ने 26 अक्तूबर 1998 को चीफ इंजीनियर केके जैरथत समेत आठ पर गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज सेक्टर-32 (जीएमसीएच-32) में बिजली के कामों में 35 लाख रुपये गबन करने का मामला दर्ज किया था।
विजिलेंस का आरोप था कि 25 कामों की अलॉटमेंट से 35 लाख रुपये का नुकसान हुआ था।
अदालत में सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि ये सभी काम टेंडर आमंत्रित कर कराए गए थे। लोएस्ट बिडर को काम दिया गया था। केके जैरथ के वकील तरमिंदर सिंह ने अदालत को बताया कि सभी कामों के जायज रेट तय किए गए थे।
आरोप लगने के बाद जीएमसीएच में हुए कामों की सेंट्रल विजिलेंस कमीशन, नई दिल्ली (सीवीसी) ने भी जांच की थी। सीवीसी की जांच में सभी काम ठीक पाए गए थे।
वकील तरमिंदर सिंह ने आरोप लगाए कि जैरथ के खिलाफ तत्कालीन होम सेक्रेटरी अनुराधा गुप्ता के इशारे पर मामले दर्ज किए गए थे।
विजिलेंस ने केके जैरथ के खिलाफ सात मामले दर्ज किए थे। उनमें से पांच मामलों में उन्हें अदालत से राहत मिल गई है। अदालत ने उन्हें इन सभी मामलों में बरी कर दिया है।