शहर के पॉश इलाके ऋषि नगर स्थित सूर्य विहार के पीछे निगम की जमीन पर 35 साल से हुए कब्जे गिराने गई निगम टीम, पुलिस और इलाके के लोगों में टकराव हुआ।
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कब्जे हटाने का विरोध कर रहे लोगों ने पुलिस टीम पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। जवाब में पुलिस ने पानी की बौछारें और बाद में लाठीचार्ज किया। इसमें कांग्रेस के इलाका विधायक भारत भूषण आशू, एक इंस्पेक्टर, निगम मुलाजिम समेत करीब छह लोग घायल हो गए। गुस्साए पुलिस वालों ने लोगों को घर से बाहर निकाल निकाल पर पीटा। बाद में पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लेते हुए कब्जे गिराने की कार्रवाई शुरू की और दोपहर बाद तक गिरा दिए। इस कार्रवाई के बाद इलाके में स्थिति तनावपूर्ण है।
निगम ने पुलिस के साथ मिल कर कार्रवाई की
अशोक विहार में करीब 19 अवैध कब्जों पर निगम ने पुलिस के साथ मिल कर कार्रवाई शुरू की। इसकी भनक लोगों को पहले से ही लग गई थी। इसलिए महिलाएं गली के बाहर धरने पर बैठ गईं और जमकर नारेबाजी की। भाजपा के पूर्व प्रधान प्रो राजिंदर भंडारी, कांग्रेसी विधायक भारत भूषण आशू समेत कई पार्षद भी मौके पर मौजूद थे।
निगम की टीम भारी लाव लश्कर एवं बड़ी संख्या में पुलिस मुलाजिमों के साथ मौके पर पहुंची। सारे इलाके को पहले सील कर दिया गया। पुलिस को देख कर लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी और विरोध किया। इस पत्थरबाजी के दौरान एक पत्थर विधायक आशू के सिर पर लगा। पुलिस ने पानी की बौछारें करके लोगों को वहां से हटाने का प्रयास किया।
इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और मौके से लोगों को खदेड़ा। लोगों को तितर बितर करने के बाद निगम के दस्ते ने 19 कब्जों पर बुलडोजर चलाया। आखिर तक लोग निगम की इस कार्रवाई का विरोध करते रहे। लोगों का आरोप था कि वे पिछले 30-35 साल से यहां बैठे थे।
19 कब्जों को गिराने के लिए योजना
हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए निगम ने एक दिन पहले ही इलाके के करीब 39 कब्जों पर लाल निशान और नोटिस लगा दिया था। इसके बाद आज सुबह कई लोग राजनेताओं के साथ अपने दस्तावेज लेकर पहुंच गए। दस्तावेज देखने के बाद 20 कब्जों को लिस्ट से निकाल दिया और 19 कब्जों को गिराने के लिए योजना तैयार कर ली।
निगम के जोनल कमिश्नर पीएस घुम्मण एवं एडिशनल कमिश्नर मनजीत सिंह के नेतृत्व में एटीपी कमलजीत कौर समेत कई अधिकारियों ने दस जेसीबी मशीन, टिप्पर एवं पुलिस के 400 मुलाजिम लेकर कूच किया।
पुलिस ने शुरू कर दिया लाठीचार्ज
कब्जे वाली जगह पर कांग्रेस एवं भाजपा के नेता एवं पार्षद मौजूद थे। जब इन्होंने विरोध किया तो पुलिस ने हाई कोर्ट का हवाला देकर पीछे होने की बात की। पुलिस ने पार्षदों एवं नेताओं को हिरासत में ले लिया।
इस पर मकानों पर चढ़े और सड़क पर मौजूद लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। एडीसीपी सतबीर सिंह अटवाल के नेतृत्व में आई पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया।
लोगों का आरोप था कि जिन्होंने पत्थर बरसाएं, वे भाग गए और बेकसूर लोगोें को पुलिस ने घर से बाहर निकाल कर मारा। लोगों का आरोप था कि पत्थरबाजी नेताओं के साथ आए कुछ शरारती तत्वों ने की। जबकि उसका खामियाजा इलाके के लोगों को भुगतना पड़ा।
पुलिस ने घर से निकाल कर पीटा
पुलिस के लाठीचार्ज में जख्मी हुए मोहन सिंह ने कहा कि कुछ समय पहले ही उसकी दुर्घटना में टांगे टूट गई थी। उसके बाद आज पुलिस ने घर से निकाल कर पीटा। जबकि वह पत्थरबाजी करना तो दूर, बिस्तर से नहीं उठा सकता। बुजुर्ग महिला संतोष रानी ने कहा कि पुलिस ने उसे भी बुरी तरह मारा।
उधर निगम के अधिकारी पीएस घुम्मण ने कहा कि पुलिस के सहयोग से 19 कब्जों पर कार्रवाई की गई है। कार्रवाई के दौरान एक पुलिस इंस्पेक्टर मनोज सिंह, बिल्डिंग इंस्पेक्टर प्रदीप सहगल समेत छह मुलाजिम जख्मी हुए हैं। इनको इलाज के लिए सिविल अस्पताल भेजा गया है। लेकिन सभी ही हालत अब सही है।
विधायक भारत भूषण आशू ने इस कार्रवाई को गलत ठहराया है। आशू ने कहा कि निगम की टीम कब्जे गिराने में मनमानी कर रही है। निगम ने 39 में से बीस मकान अलाट कर दिए और बाकी 19 को भी इसी तरह अलाट किया जा सकता था। बलजिंदर सिंह, डीएसपी