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पांच साल में 22 हजार से ज्यादा शराबी चालकों के चालान

Mon, 11 Apr 2016 10:41 AM IST
पवन तिवारी/अमर उजाला, चंडीगढ़
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ट्रैफिक चालान - फोटो : demo pics
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यूटी ट्रैफिक पुलिस एंटी ड्रंकन नाकों के दौरान हर साल साढ़े चार हजार से अधिक चालान काटती है। पिछले पांच साल में पुलिस एंटी डंकन नाकों के दौरान 22 हजार से ज्यादा लोगों के चालान कर चुकी है। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में चालान के बाद भी सड़कों पर शराबियों के हंगामे व हादसों में कमी नही आई है।
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जानकारों का मानना है कि ज्यादातर हिट एंट रन के मामले शराबी चालकों द्वारा ही अंजाम दिए जाते हैं। इसीलिए वे एक्सीडेंट के बाद मौके से भाग जाते हैं।  बाद में जब उनका नशा उतरता है तो वे पुलिस के सामने गिरफ्तारी दे देते हैं। इसके पश्चात घंटे भर में उनको जमानत भी मिल जाती है।

पिछले साल घटी संख्या
पुलिस का शराबी चालकों के खिलाफ सख्ती दिखाने का थोड़ा असर दिखा है। एंटी ड्रंकन नाकों में पिछले साल कुछ गिरावट आई । जहां 2014 में एंटी डंकन नाकों के दौरान 4903 चालान काटे गए थे, वहीं 2015 में 4038 वाहन चालकों के चालान कटे। इसी तरह पिछले साल कोर्ट शराबी चालकों की कोर्ट में सजा पाने की संख्या में कमी आई। 2015 में 105 लोगों को कोर्ट ने सजा सुनाई जबकि साल 2014 में 197 लोगों को कोर्ट ने सजा सुनाई गई थी।
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2016 के तीन माह में 828 चालान
 इस साल पहले तीन महीनों में ट्रैफिक पुलिस शराब पीकर वाहन चलाते 828 लोगों के चालान किए हैं। 54 लोगों को कोर्ट से  सजा सुना चुकी है। होली के दिन पुलिस ने कुल 71 लोगों के चालान काटे थे। जिसमें कोर्ट ने एक दिन में ही 33 शराबियों को तीन से छह महीने तक की सजा सुनाई थी।

299 के लाइसेंस रद्द
ट्रैफिक पुलिस शहर में 2015 तक कुल 299 तीन बार से ज्यादा बार यातायात के नियमों को तोड़ने पर चालान होने वालों के लाइसेंस तीन महीने से लेकर छह महीने केलिए कैंसल कर चुकी है। इसमें 2015 में कुल 14 लोगों के लाइसेंस कैंसल हुए थे।

पिछले पांच सालों में शहर में हुए ड्रंकन ड्राइविंग के चालान
साल        चालान
2011       4679
2012       4703
2013        4676
2014        4903
2015        4037

आसानी से मिल रही तभी ड्रंकन ड्राइविंग 
शहर में इस समय 100 ठेके है। लगभग हर सेक्टर में 2 ठेके खुले हुए हैं। ये ठेके  रात में 11 बजे तक खुले रहते हैं। जानकारों का कहना है कि शराब पीकर गाड़ियां चलाने के पीछे एक बड़ा कारण शराब का आसानी से मिलना भी है। सेक्टर 23 डी  रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान गुरदेव राम का कहना है कि लोगों को अपने अधिकार तो याद रहते हैं मगर ड्यूटी भूल जाते हैं। सड़क पर शराब पीकर वाहन चलाने से पहले दूसरों के बारे में भी सोचना चाहिए। अगर प्रशासन इन ठेकों को संख्या कम कर दे या थोड़ा आबादी से हटकर बनाए तो लोगों में शराब के सेवन में कमी आएगी और हादसे भी कम होंगे।

लोगों को जागरूक करे पुलिस
सेक्टर 19 रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष आर सी गोयल का कहना है कि पुलिस लगातार शहर में ड्रंकन ड्राइव को लेकर मुहिम चलाए और लोगों को जागरूक करे। शराब पीकर वाहन चलाना हादसे को तो न्योता है ही साथ ही रोड रेज जैसे मामले भी सामने आते हैं। शराब केठेकों की संख्या व उसकी उपलब्धता अगर कम होगी तो हादसों व झगड़ों में कमी आएगी। फॉसवेक के पूर्व प्रधान पीसी सांघी का कहना है कि  सेक्टरों से शराब के ठेकेकम होंगे तो सड़क पर हादसे कम होंगे। मार्केटों से ठेके दूर होने चाहिए जिससे लोगों को शराब आसानी से न मिले।

परगट के साथ शराबी ने की थी मारपीट
पूर्व हॉकी खिलाड़ी व अकाली एमएलए परगट सिंह के साथ सेक्टर 9 में एक शराबी ने पार्किंग को लेकर मारपीट की थी। जिसमें परगट सिंह की दो उंगलियां टूट गई थीं। उसके बाद सेक्टर 36-23 की डिवाडिंग रोड पर बीएससी की छात्राओं ने शराब के नशे में हंगामा किया था। पुलिस ने एक लड़की को गिरफ्तार भी किया था। जिसकेबाद कोर्ट में लड़की ने अपनी सगाई होने की दलील दी थी जिसके बाद कोर्ट ने जुर्माना कर छोड़ दिया था।

मनीष चौधरी, एसएसपी, यूटी ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक पुलिस समय- समय पर लोगों को जागरूक करती रहती है। पुलिस और कोर्ट की सख्ती के कारण ही ड्रंकन ड्राइविंग में कमी आई है। अब युवक शराब पीने के बाद साथ में ड्राइवर रखते हैं क्योंकि उनको पता होता है कि आगे नाका लगा होगा। इसी कारण ड्रंकन ड्राइव चालानों में भी पिछले साल कमी आई है।
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